राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान, 15 हजार से ज्यादा हाईरिस्क मामले चिन्हित
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेशभर में एक विशेष अभियान का आगाज किया है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के दिशा-निर्देशों में चलाए जा रहे इस पांच दिवसीय अभियान का मुख्य लक्ष्य उन गर्भवती महिलाओं की पहचान करना है, जिन्हें प्रसव के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का अधिक खतरा हो सकता है। अभियान के शुरुआती दो दिनों में ही विभाग ने रिकॉर्ड स्तर पर काम करते हुए 1 लाख 6 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य डेटा की गहन जांच की है।
हाईरिस्क प्रेग्नेंसी की विशेष निगरानी और समीक्षा
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जांच की गई महिलाओं में से 15 हजार 504 महिलाओं को ‘हाईरिस्क प्रेग्नेंसी’ की श्रेणी में रखा गया है। इन महिलाओं के स्वास्थ्य की विशेष समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य फोकस इन महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग, समय पर उचित उपचार और सुरक्षित संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) सुनिश्चित करना है ताकि जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर को न्यूनतम किया जा सके।
अभियान की प्रमुख विशेषताएं और निरीक्षण
चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़ ने बताया कि अभियान के तहत न केवल डेटा की जांच की जा रही है, बल्कि धरातल पर सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता को भी परखा जा रहा है। अभियान के तहत किए गए प्रमुख कार्यों का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:
| कार्य का विवरण | आंकड़े/स्थिति |
|---|---|
| जांच की गई गर्भवती महिलाएं | 1,06,000+ |
| हाईरिस्क श्रेणी में चिन्हित महिलाएं | 15,504 |
| निरीक्षित सरकारी स्वास्थ्य संस्थान | 3,808 |
| रियल टाइम सत्यापन और साक्षात्कार | 6,794 |
मैपिंग, ट्रैकिंग और पोर्टल पर रियल टाइम अपडेट
विभाग ने हाईरिस्क श्रेणी वाली महिलाओं के लिए एक विशेष मैपिंग और ट्रैकिंग तंत्र विकसित किया है। विशेष रूप से तीसरी तिमाही (Third Trimester) में पहुंच चुकी महिलाओं के लिए प्रसव की संभावित तिथि और रेफरल की पूर्व व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
- सुपरविजन पोर्टल: सभी निरीक्षणों और समीक्षाओं का विवरण उसी दिन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है।
- सुधार के निर्देश: जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव पूर्व जांच (ANC) और रिकॉर्ड संधारण में कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल प्रभाव से सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
- नियमित बैठकें: जिला, ब्लॉक और सेक्टर स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं ताकि किसी भी गर्भवती महिला को उपचार में देरी न हो।
इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजस्थान की हर गर्भवती महिला को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सही समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से मिले, जिससे प्रसव के दौरान आने वाली आपातकालीन स्थितियों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
