Monsoon Update: चित्तौड़गढ़ में झमाझम बारिश, 26 जुलाई तक भारी अलर्ट जारी


लंबे समय से बादलों की बाट जोह रहे चित्तौड़गढ़ जिले के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। मंगलवार देर रात सक्रिय हुए मानसून ने पूरे जिले की फिजा बदल दी है। शहर सहित अधिकांश इलाकों में हुई अच्छी वर्षा से न केवल तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, बल्कि आम जनजीवन को भीषण…

चित्तौड़गढ़ में मानसून की जोरदार वापसी: झमाझम बारिश से गर्मी और उमस से मिली बड़ी राहत

लंबे समय से बादलों की बाट जोह रहे चित्तौड़गढ़ जिले के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। मंगलवार देर रात सक्रिय हुए मानसून ने पूरे जिले की फिजा बदल दी है। शहर सहित अधिकांश इलाकों में हुई अच्छी वर्षा से न केवल तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, बल्कि आम जनजीवन को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग ने अगले 26 जुलाई तक जिले में मानसून के सक्रिय रहने और कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई है।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का हाल

मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश ने जिले के लगभग हर हिस्से को भिगो दिया है। हालांकि, बेगूं और बड़ीसादड़ी को छोड़कर बाकी सभी उपखंडों में मेघ जमकर बरसे। आंकड़ों के अनुसार, जिले में बारिश का वितरण इस प्रकार रहा:

  • रावतभाटा: 23 एमएम
  • राशमी: 18 एमएम
  • गंगरार: 10 एमएम
  • चित्तौड़गढ़ शहर: 8 एमएम
  • भोपालसागर: 7 एमएम
  • कपासन: 6 एमएम
  • डूंगला: 5 एमएम
  • भदेसर: 3 एमएम
  • निंबाहेड़ा और बस्सी: 2 एमएम

तापमान में गिरावट और सुहाना मौसम

बारिश के आने से पारे में भी गिरावट देखी गई है। पिछले 24 घंटों में चित्तौड़गढ़ का अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है, जो कि पिछले 48 घंटों की तुलना में काफी कम है। घने बादलों के कारण बुधवार की सुबह बेहद सुहावनी रही। उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम किसी वरदान से कम नहीं है।

मानसून की स्थिति और आगामी पूर्वानुमान

मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में अब तक जिले में कुल 241 एमएम औसत बारिश दर्ज की गई है, जो कि कुल औसत का 32.13 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले चार दिनों तक बारिश का यह दौर इसी तरह जारी रहता है, तो जिले में बारिश की कमी की भरपाई होने की प्रबल संभावना है। यह बारिश खरीफ की फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगी और स्थानीय जल स्रोतों में भी नए पानी की आवक सुनिश्चित करेगी।


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