देश में कमजोर मानसून के चलते बढ़ा मौसमी बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट
इस साल देश में कमजोर मानसून की संभावनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बारिश की कमी, उमस और बढ़ती गर्मी के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने मौसमी बीमारियों के प्रकोप की आशंका जताई है। मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक आधिकारिक पत्र लिखकर डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर देश भर में हाई रिस्क जिलों की सूची तैयार की है, जहां विशेष निगरानी की आवश्यकता है।
राजस्थान के 8 जिले हाई रिस्क जोन में शामिल
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी की गई हाई रिस्क जिलों की सूची में राजस्थान के 8 जिलों को चिन्हित किया गया है। इन जिलों को उन क्षेत्रों के आधार पर चुना गया है जहां बीते तीन वर्षों में डेंगू और मलेरिया के 500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में निम्नलिखित प्रमुख कदम उठाए जाएंगे:
- जयपुर, कोटा और उदयपुर जैसे प्रमुख जिलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
- मच्छरों के पनपने से रोकने के लिए हर सप्ताह ‘ड्राइंग-डे एक्टिविटी’ का आयोजन किया जाएगा।
- संभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर एंटीलार्वा गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
- आमजन को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करने का अभियान चलाया जाएगा।
विभिन्न राज्यों में बीमारियों का जोखिम और मंत्रालय की तैयारी
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 23 जिलों को संवेदनशील माना गया है। इसके अलावा, अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार है:
- महाराष्ट्र: 15 जिले
- पश्चिम बंगाल: 13 जिले
- बिहार और पंजाब: 9-9 जिले
- हरियाणा और राजस्थान: 8-8 जिले
- दिल्ली: 7 क्षेत्र
- मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड: 4-4 जिले
- छत्तीसगढ़: 1 जिला
रेपिड रेस्पोंस टीम और संसाधनों की उपलब्धता के निर्देश
मौसमी बीमारियों के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को रेपिड रेस्पोंस टीम (RRT) गठित करने का निर्देश दिया है। ये टीमें बीमारियों की ट्रेसिंग और मरीजों के प्राथमिक उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। साथ ही, अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ब्लड, ब्लड कॉम्पोनेंट्स और जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक अनिवार्य रूप से बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
