Highcourt: राष्ट्र सर्वोपरि, बॉर्डर के पास अवैध निर्माण तुरंत हटेंगे

राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बने धार्मिक स्थलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अदालत ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें सीमावर्ती क्षेत्रों में बने धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए जारी किए गए सरकारी नोटिसों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने…

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सीमावर्ती इलाकों में अवैध धार्मिक निर्माणों को हटाने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बने धार्मिक स्थलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अदालत ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें सीमावर्ती क्षेत्रों में बने धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए जारी किए गए सरकारी नोटिसों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और आस्था के नाम पर नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राष्ट्र की सुरक्षा सबसे ऊपर: जस्टिस समीर जैन की टिप्पणी

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने जैसलमेर के रामगढ़ स्थित पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान राष्ट्र प्रेम की भावना को सर्वोपरि रखते हुए एक कविता के माध्यम से अपना संदेश दिया:

“ना मंदिर, ना मस्जिद, ना कोई दीवार बड़ी होती है, जब मातृभूमि की रक्षा की बारी खड़ी होती है। जो भूमि है राष्ट्र की, वह पहले राष्ट्र की ही रहेगी, जहां सुरक्षा का प्रश्न उठे, वहां राष्ट्र प्रधान रहे।”

अदालत ने माना कि सीमावर्ती इलाकों में बिना सक्षम अनुमति के बनाए गए धार्मिक ढांचे पूरी तरह से अवैध हैं और इन्हें हटाना कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

जांच के लिए बनेगी विशेष कमेटी

हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 0 से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले संदिग्ध निर्माणों की जांच के लिए एक विशेष कमेटी के गठन का निर्देश दिया है। इस कमेटी की संरचना और कार्यप्रणाली निम्नलिखित होगी:

  • कमेटी के सदस्य: संबंधित जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वरिष्ठ अधिकारी।
  • कार्यप्रणाली: यह कमेटी प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच करेगी।
  • निर्णय का आधार: सुरक्षा पहलू, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और अन्य कानूनी तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
  • कार्रवाई: कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अवैध निर्माणों को हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा में कोई समझौता नहीं

अदालत ने अपने आदेश में जोर देते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जा सकती। इस कार्रवाई को किसी विशेष धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि कानून सभी के लिए समान है।

प्रमुख बिंदु विवरण
अदालत का रुख राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने आस्था के नाम पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं।
दायरा सीमा से 0 से 50 किलोमीटर तक का संवेदनशील क्षेत्र।
अवैध निर्माण गोचर, ओरण और सरकारी जमीनों पर बिना अनुमति किए गए निर्माण।
कानूनी आधार गृह मंत्रालय के सुरक्षा दिशा-निर्देश और BSF का विस्तारित अधिकार क्षेत्र।

क्यों लिया गया यह फैसला?

केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन सर्वे किया था। इस सर्वे में यह बात सामने आई कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब कई धार्मिक स्थल और ढांचों का निर्माण जिला प्रशासन की बिना किसी अनुमति के किया गया है। इनमें से अधिकांश निर्माण सरकारी जमीन, ओरण या गोचर भूमि पर पाए गए। प्रशासन द्वारा इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे, जिन्हें प्रभावित समितियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब अदालत ने खारिज कर दिया है।


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