Jagannath मेला: सरकारी स्कूल के कमरों में पुलिस ड्यूटी, 5 दिन बंद रहेंगे स्कूल

राजस्थान के अलवर शहर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध श्री जगन्नाथजी मेले का उत्साह शहर के लिए तो बड़ा उत्सव है, लेकिन रूपबास राजकीय विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल परिसर में ही मेला लगने के कारण यहां पढ़ने वाले 96 बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।…

अलवर: श्री जगन्नाथजी मेले की भेंट चढ़ी स्कूली बच्चों की पढ़ाई

राजस्थान के अलवर शहर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध श्री जगन्नाथजी मेले का उत्साह शहर के लिए तो बड़ा उत्सव है, लेकिन रूपबास राजकीय विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्कूल परिसर में ही मेला लगने के कारण यहां पढ़ने वाले 96 बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है। स्कूल में कुल तीन ही कमरे हैं और मेले के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा मॉनिटरिंग और ड्यूटी के लिए इन कमरों पर कब्जा कर लिया जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है।

पांच दिन की आधिकारिक छुट्टी और 10 दिन का नुकसान

मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था के कारण छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। स्थिति की गंभीरता को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • आधिकारिक अवकाश: तीन दिन मेला ड्यूटी, एक दिन कलेक्टर पावर से छुट्टी और रविवार को मिलाकर कुल 5 दिन की आधिकारिक छुट्टियां घोषित कर दी जाती हैं।
  • शैक्षणिक नुकसान: शिक्षकों के अनुसार, मेले के शोर-शराबे और कम उपस्थिति के कारण वास्तविक रूप से 9 से 10 दिनों तक पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित रहती है।
  • संसाधनों की कमी: स्कूल में कमरे कम होने के कारण एक ही कमरे में दो से तीन कक्षाएं एक साथ बिठानी पड़ती हैं, जिससे पढ़ाई का स्तर गिरता है।

सिलेबस पूरा करने में हो रही भारी मशक्कत

आठवीं बोर्ड की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि कक्षाओं के लगातार बाधित होने से उनका सिलेबस पीछे छूट जाता है। छात्र आलोक शर्मा ने बताया कि एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई होने से शिक्षकों की आवाज आपस में टकराती है, जिससे एकाग्रता बनाए रखना नामुमकिन हो जाता है। मजबूरी में कई बार बच्चों को बरामदे या पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है। विद्यालय की प्रधानाचार्य दीपा शर्मा ने स्वीकार किया कि हर साल मेले के दौरान यही स्थिति बनती है, जिसे बाद में अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर कवर करने का प्रयास किया जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

स्कूल की बदहाल स्थिति केवल कमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। विद्यालय की चारदीवारी कई जगहों से टूटी हुई है, जिसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को मेले के दौरान स्कूल भेजने से कतराते हैं। उन्हें डर रहता है कि बच्चे स्कूल छोड़कर मेले की भीड़ में न चले जाएं।

समस्या प्रभाव
कमरों का अभाव तीन कमरों में 96 बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी
मेले का शोर कक्षाओं में पढ़ाई का माहौल न बन पाना
टूटी चारदीवारी बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता

गौरतलब है कि करीब तीन साल पहले स्कूल के जर्जर कमरों को हटा दिया गया था, लेकिन उनकी जगह नए कमरों का निर्माण आज तक नहीं हो सका है। नतीजतन, शैक्षणिक वर्ष भर बच्चे अव्यवस्था के बीच शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यार्थियों के हित में जल्द से जल्द बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।


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