AI प्रोफेशनल्स का पलायन: बेहतर सैलरी और मौकों के लिए जा रहे अमेरिका

भारत की मेधावी युवा शक्ति, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ, अब देश में रुकने के बजाय अमेरिका का रुख करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। फोर्ब्स इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ने इस गंभीर समस्या पर रोशनी डाली है। सिलिकॉन वैली में काम करने वाले भारतीय शोधकर्ताओं का स्पष्ट…

भारत का ‘एआई टैलेंट’ क्यों कर रहा है पलायन? वैश्विक रेस में पिछड़ने का खतरा

भारत की मेधावी युवा शक्ति, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ, अब देश में रुकने के बजाय अमेरिका का रुख करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। फोर्ब्स इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ने इस गंभीर समस्या पर रोशनी डाली है। सिलिकॉन वैली में काम करने वाले भारतीय शोधकर्ताओं का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका में मिलने वाला आकर्षक वेतन और विश्व स्तरीय एआई प्रोजेक्ट्स पर काम करने के अवसर उन्हें वहां टिके रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं। भारत लौटने के लिए उनके पास कोई ठोस कारण नजर नहीं आता, जिसके चलते अब कई भारतीय स्टार्टअप संस्थापकों ने भी अपने नए एआई वेंचर्स की शुरुआत भारत के बजाय सीधे अमेरिका में ही करना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर पड़ रहा है, जहां देश पिछड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, भारत को एंटरप्राइज एआई टैलेंट का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन टॉप-लेवल टैलेंट का लगातार बाहर जाना एक चिंताजनक संकेत है।

हायरिंग का बदलता ट्रेंड: एआई जॉब्स में उछाल, कुल भर्तियों में गिरावट

भारतीय आईटी सेक्टर में लंबे अंतराल के बाद भर्तियों का दौर शुरू तो हुआ है, लेकिन इसमें एक बड़ा बदलाव देखा गया है। कंपनियां अब व्यापक स्तर पर भर्ती करने के बजाय केवल चुनिंदा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। नौकरी जॉबस्पीक की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एआई से संबंधित नौकरियों में 16 फीसदी का इजाफा हुआ है, जबकि कुल भर्तियों में 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

क्षेत्र बदलाव (जून 2026)
एआई संबंधित नौकरियां +16%
कुल भर्ती -3%

कंपनियां अब नए कर्मचारियों को काम पर रखने के बजाय अपने मौजूदा वर्कफोर्स को एआई के लिए रीस्किल करने (पुनः प्रशिक्षित करने) को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं।

2027 तक 6 लाख एआई विशेषज्ञों की भारी किल्लत

नैसकॉम (NASSCOM) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में एआई विशेषज्ञों की भारी कमी होने वाली है। अनुमान है कि 2027 तक देश में 6 लाख से अधिक एआई प्रोफेशनल्स की कमी हो सकती है। हालांकि, शुरुआती करियर वाले 90 फीसदी से ज्यादा टेक प्रोफेशनल्स एआई टूल्स का उपयोग करना जानते हैं, लेकिन इनमें से मात्र 23 फीसदी ही ऐसे हैं जो स्वतंत्र रूप से जटिल एआई सिस्टम विकसित करने और उन्हें लागू करने की तकनीकी क्षमता रखते हैं।

  • व्यावहारिक अनुभव की कमी: फाइंडेबिलिटी साइंसेज के सीईओ आनंद माहुरकर के अनुसार, कॉलेज से निकलने वाले ग्रेजुएट्स को पायथन कोडिंग और मशीन लर्निंग का सैद्धांतिक ज्ञान तो है, लेकिन उनके पास व्यावहारिक अनुभव का अभाव है।
  • इंडस्ट्री और एकेडमिक्स में अंतर: किताबी ज्ञान और कंपनियों की वास्तविक जरूरतों के बीच एक बड़ी खाई मौजूद है, जिसे भरना अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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