Rancho का किरदार सोनम वांगचुक से नहीं, इस छात्र से है प्रेरित

बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म '3 इडियट्स' को रिलीज हुए 15 साल से अधिक का समय बीत चुका है। इतने वर्षों में एक दावा लगातार चर्चा में रहा है कि फिल्म का मुख्य किरदार रैंचो उर्फ फुंसुख वांगडू, प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित है। यह चर्चा इतनी बार दोहराई गई कि अब…

क्या फिल्म ‘3 इडियट्स’ का रैंचो वाकई सोनम वांगचुक से प्रेरित है? जानें सच्चाई

बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘3 इडियट्स’ को रिलीज हुए 15 साल से अधिक का समय बीत चुका है। इतने वर्षों में एक दावा लगातार चर्चा में रहा है कि फिल्म का मुख्य किरदार रैंचो उर्फ फुंसुख वांगडू, प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित है। यह चर्चा इतनी बार दोहराई गई कि अब इसे आम जनता ने एक स्थापित तथ्य मान लिया है। हालांकि, फिल्म से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्माताओं के बयानों का विश्लेषण करने पर इस दावे की वास्तविकता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

रैंचो और सोनम वांगचुक में समानताएं और अंतर

पहली नजर में दोनों के बीच कुछ समानताएं नजर आती हैं, जैसे दोनों इंजीनियर हैं, शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, स्कूल चला रहे हैं और दोनों का संबंध लद्दाख से है। फिल्म में रैंचो का असली नाम ‘फुंसुख वांगडू’ है, जो सोनम वांगचुक के नाम से मिलता-जुलता है। लेकिन, फिल्म की पूरी कहानी रैंचो के एक अमीर परिवार के बेटे की पहचान अपनाकर इंजीनियरिंग करने और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सोनम वांगचुक के वास्तविक जीवन से काफी अलग है।

बिंदु फिल्म रैंचो सोनम वांगचुक
पेशा इंजीनियर और आविष्कारक इंजीनियर और शिक्षा सुधारक
कार्य क्षेत्र लद्दाख में स्कूल लद्दाख में SECMOL स्कूल
प्रेरणा FTII के एक छात्र की कहानी स्वयं का सामाजिक कार्य

टाइमलाइन और लेखकों का स्पष्टीकरण

तथ्यों की बात करें तो ‘3 इडियट्स’ की पटकथा 1 अगस्त 2007 को स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन के साथ पंजीकृत हो चुकी थी। जबकि आमिर खान और सोनम वांगचुक की पहली मुलाकात अप्रैल 2008 में हुई थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद किसी व्यक्ति से प्रेरित होना संभव है? फिल्म के लेखक अभिजात जोशी और निर्देशक राजकुमार हिरानी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि रैंचो का किरदार FTII के एक छात्र की वास्तविक कहानी से प्रेरित था, जो केवल सीखने के लिए दूसरे की पहचान अपनाकर कॉलेज गया था।

प्रचार का हिस्सा नहीं था यह दावा

  • 2009 में फिल्म के प्रमोशन के दौरान कहीं भी रैंचो को सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं बताया गया।
  • आमिर खान ने भी सार्वजनिक मंचों पर इस बात को नकारते हुए इसे महज एक संयोग बताया है।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2010 में स्थानीय स्तर पर शुरू हुई चर्चा धीरे-धीरे एक अफवाह के रूप में फैल गई।
  • सोशल मीडिया और मीडिया में बार-बार दोहराए जाने के कारण लोगों ने इसे सच मान लिया।

निष्कर्ष: क्या यह केवल एक लोकप्रिय धारणा है?

वर्तमान में उपलब्ध रिकॉर्ड यही दर्शाते हैं कि रैंचो और सोनम वांगचुक की तुलना समय के साथ एक लोकप्रिय धारणा बन गई है, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं हैं। फिल्म के लेखकों और निर्माताओं का रुख स्पष्ट है कि रैंचो का चरित्र एक काल्पनिक घटना से प्रेरित था। हालांकि, यह बहस आज भी जारी है कि क्या फिल्म की पटकथा लिखने के दौरान निर्माताओं ने कभी वांगचुक के काम का अध्ययन किया था। फिलहाल, इसे एक दिलचस्प संयोग से अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता है।


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