Exclusive: इंजीनियरों का 2 लाख का खेल, चहेतों को 43 करोड़ का ठेका, बड़े अफसर बेदाग

राजस्थान के बिजली विभाग यानी अजमेर डिस्कॉम में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। 14 जिलों में फैले इस डिस्कॉम के इंजीनियर्स पर आरोप है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में नियमों को ताक पर रखकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को 43.86 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए। यह पूरा खेल 'ई-टेंडरिंग' से बचने…

अजमेर डिस्कॉम में 43.86 करोड़ का बड़ा घोटाला: नियमों की धज्जियां उड़ाकर चहेतों को बांटे टेंडर

राजस्थान के बिजली विभाग यानी अजमेर डिस्कॉम में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। 14 जिलों में फैले इस डिस्कॉम के इंजीनियर्स पर आरोप है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में नियमों को ताक पर रखकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को 43.86 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए। यह पूरा खेल ‘ई-टेंडरिंग’ से बचने के लिए किया गया, जिसमें 2 लाख रुपये से कम के कार्यों के लिए कोटेशन पद्धति का सहारा लिया गया।

सर्कल ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि इस गड़बड़ी की जानकारी उच्च प्रबंधन को पहले से थी, लेकिन अब दोषियों को बचाने के लिए पर्दे के पीछे से खेल खेला जा रहा है।

यह भी पढ़ेंRGHS: 2 हजार तक के मेडिकल टेस्ट अब बिना मंजूरी होंगे फ्री

यह भी पढ़ेंसवाईमाधोपुर में मनचले को युवतियों ने पीटा:दुकानदारों ने पुलिस के हवाले किया; कोचिंग जाते समय करता था परेशान

यह भी पढ़ेंTransport हड़ताल: राजस्थान में 10 हजार ट्रक बंद, VLTD और परमिट पर घमासान

ऐसे हुआ करोड़ों का फर्जीवाड़ा

जांच के मुताबिक, नियमों का फायदा उठाकर इंजीनियर्स ने बड़ी खरीद को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया। RTPP एक्ट के तहत 2 लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए ई-टेंडरिंग अनिवार्य है, लेकिन अधिकारियों ने इस नियम को दरकिनार कर दिया।

  • कोटेशन का दुरुपयोग: 2 लाख से कम के काम के लिए सिर्फ कोटेशन मंगवाने की सुविधा थी, जिसका गलत फायदा उठाया गया।
  • स्पीलिटिंग ऑफ पावर: एक बड़े काम को कई छोटे वर्क ऑर्डर में बांट दिया गया ताकि ई-टेंडर की प्रक्रिया से बचा जा सके।
  • पारदर्शिता की कमी: खरीद में राजस्थान सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता अधिनियम (RTPP Act, 2013) के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।

कार्रवाई के नाम पर लीपापोती?

सूत्रों का कहना है कि डिस्कॉम सचिव द्वारा जारी हालिया आदेश केवल खानापूर्ति है। आदेश में कहा गया है कि 2 करोड़ से ज्यादा की खरीद करने वाले अधीक्षण अभियंताओं (SE) पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और 1 करोड़ से अधिक वाले अधिकारियों को केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ दिया जाएगा। सवाल यह उठ रहा है कि 1 करोड़ से कम की गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को खुला संरक्षण क्यों दिया जा रहा है?

खरीद की सीमाप्रस्तावित कार्रवाई
2 करोड़ से अधिकनियम 6 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई
1 करोड़ से 2 करोड़ के बीचकारण बताओ नोटिस
1 करोड़ से कमकोई स्पष्ट निर्देश नहीं (बचाव की संभावना)

भीलवाड़ा का उदाहरण और सवालिया निशान

भीलवाड़ा के तत्कालीन एसई ओ.पी. महला ने एक ही दिन में 2-2 लाख के 25 वर्क ऑर्डर जारी कर 50 लाख की सामग्री खरीद ली थी। उन्हें सस्पेंड तो कर दिया गया, लेकिन अब विभाग द्वारा जारी नए आदेशों से यह स्पष्ट हो रहा है कि अन्य जिलों के अधिकारियों को बचाने की रणनीति तैयार की गई है। भास्कर की पड़ताल में जब इस बाबत सचिव से बात की गई, तो उन्होंने ऐसे किसी भी आदेश से इनकार कर दिया, जबकि कागजों पर यह आदेश मौजूद है।

क्या है RTPP नियम?

नियमों के अनुसार, 2 लाख रुपये तक की खरीद के लिए विभाग को न्यूनतम 3 रजिस्टर्ड सप्लायर्स से कोटेशन मंगाने होते हैं और सबसे कम रेट (L1) देने वाली फर्म को काम देना होता है। लेकिन इस प्रक्रिया का उपयोग बड़े टेंडरों को टुकड़ों में बांटकर अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया, जो कि पूरी तरह से अवैध है।

फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंप दी गई है, लेकिन उच्च स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के कारण दोषियों पर ठोस कार्रवाई अभी भी लंबित है।