मेडिकल साइंस में बड़ी क्रांति: ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने सफलतापूर्वक किया सूअरों का ऑपरेशन
मेडिकल जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, वैज्ञानिकों ने पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स के जरिए सूअरों की सफल सर्जरी को अंजाम दिया है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की टीम ने ‘सर्जी’ नाम के इन रोबोट्स की मदद से सूअरों के शरीर से गॉल ब्लैडर को सुरक्षित बाहर निकाला। यह प्रयोग इसलिए भी खास है क्योंकि इसके लिए किसी महंगे या विशेष मेडिकल रोबोट का निर्माण नहीं किया गया था, बल्कि बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाले सामान्य रोबोट्स का इस्तेमाल किया गया। इन रोबोट्स की कीमत मात्र 20,000 डॉलर (करीब 19 लाख रुपये) है, जो भविष्य में सर्जरी के खर्च को काफी कम कर सकते हैं।
इस जटिल प्रक्रिया को लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी विधि से पूरा किया गया, जिसमें शरीर पर बिना कोई बड़ा चीरा लगाए सर्जरी की जाती है। रोबोट्स ने इंसानी डॉक्टरों की तरह ही अत्यधिक सावधानी बरतते हुए टिश्यूज को हटाया, नसों को क्लिप किया और लिवर को कोई नुकसान पहुंचाए बिना गॉल ब्लैडर को बाहर निकाला। इस प्रयोग की पूरी सफलता की रिपोर्ट हाल ही में प्रतिष्ठित साइंस जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित की गई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में चिकित्सा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर सकती है, जहाँ रोबोट्स जटिल ऑपरेशंस में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
इस ऐतिहासिक सर्जरी की प्रमुख विशेषताएं
- किफायती तकनीक: सर्जिकल रोबोट्स के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय, मात्र 19 लाख रुपये के सामान्य ह्यूमनॉइड रोबोट्स का उपयोग किया गया।
- सटीकता और सुरक्षा: खास सॉफ्टवेयर और फिजिकल एडॉप्टर की मदद से रोबोट्स ने इंसानी हाथों की तरह ही सटीकता के साथ सर्जिकल टूल्स को नियंत्रित किया।
- रिमोट सर्जरी का भविष्य: इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों की अनुपस्थिति में या दूरदराज के इलाकों में मरीजों को तुरंत आपातकालीन सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराना है।
- सफल तकनीक: यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के विशेषज्ञों ने इसे ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ के रूप में पूरी तरह सफल करार दिया है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
इस सफल ऑपरेशन के बाद अब वैज्ञानिक इस तकनीक को और अधिक विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में एक अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है, जो इंसानी हाथों के सूक्ष्म इशारों और मूवमेंट को रियल-टाइम में रोबोट की कलाई तक पहुँचाता है। इससे रोबोट्स को सर्जिकल टूल्स पकड़ने और उन्हें चलाने में असाधारण पकड़ मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक इंसानी प्रयोगों में भी सफल रहती है, तो यह दुनिया भर के अस्पतालों में डॉक्टरों पर काम के बोझ को कम करने के साथ-साथ उन क्षेत्रों में जीवन रक्षक साबित होगी जहाँ अनुभवी सर्जन्स की भारी कमी है।







