Protest: अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं आशा सहयोगिनियां, सौंपा ज्ञापन

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में मंगलवार का दिन आशा सहयोगिनियों के आक्रोश के नाम रहा। अपनी लंबित मांगों और प्रशासन द्वारा थोपे जा रहे अतिरिक्त कार्यभार के विरोध में जिले भर की आशा सहयोगिनियां एकजुट हुईं और कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। सहयोगिनियों ने शहर में एक विशाल रैली निकाली, जो विभिन्न मार्गों से होते…

झुंझुनूं: अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरीं आशा सहयोगिनियां, प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में मंगलवार का दिन आशा सहयोगिनियों के आक्रोश के नाम रहा। अपनी लंबित मांगों और प्रशासन द्वारा थोपे जा रहे अतिरिक्त कार्यभार के विरोध में जिले भर की आशा सहयोगिनियां एकजुट हुईं और कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। सहयोगिनियों ने शहर में एक विशाल रैली निकाली, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान उन्होंने अपनी समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

अतिरिक्त कार्यों से मूल स्वास्थ्य सेवाएं हो रही प्रभावित

प्रदर्शनकारी आशा सहयोगिनियों का मुख्य विरोध उन पर लादे जा रहे गैर-स्वास्थ्य संबंधी कार्यों को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें लगातार ऐसे कार्यों में उलझाया जा रहा है, जिनका उनके मूल काम से कोई लेना-देना नहीं है। सहयोगिनियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि उन्हें मुख्य स्वास्थ्य सेवाओं से हटाकर अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा है।

मूल स्वास्थ्य कार्य (जिन पर असर पड़ रहा है)अतिरिक्त कार्य (जिनका विरोध है)
बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरणओबीसी सर्वे (OBC Survey)
मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लानाराजधरा ऐप (Rajdhara App) पर डेटा एंट्री
आयुष्मान कार्ड बनाना और सत्यापनअन्य प्रशासनिक सर्वे कार्य

सरकार की मनमानी के खिलाफ फूटा गुस्सा

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं मंजू लालपुरिया ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन अपनी मनमानी कर रहा है। बिना किसी ठोस नीति के अतिरिक्त कार्यों का दबाव बनाने से न केवल उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन भी तनावपूर्ण हो गया है। उन्होंने इसे सरासर अन्याय करार देते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा सहयोगिनियों को उनके मूल दायित्वों से दूर करना जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

मांगें नहीं मानीं तो शुरू होगा अनिश्चितकालीन धरना

आशा सहयोगिनियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो वे पीछे नहीं हटेंगी। प्रदर्शनकारियों ने अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा:

  • मूल काम का अधिकार: उन्हें केवल उनके निर्धारित स्वास्थ्य संबंधी कार्य ही दिए जाएं।
  • अतिरिक्त बोझ से मुक्ति: किसी भी प्रकार के गैर-जरूरी सर्वे और ऐप संबंधी कार्यों से मुक्त रखा जाए।
  • अनिश्चितकालीन धरना: यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो वे कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने के लिए मजबूर होंगी।

फिलहाल, इस प्रदर्शन के बाद जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन आशा सहयोगिनियों की इन वाजिब मांगों पर क्या रुख अपनाता है।