दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का उग्र प्रदर्शन: विधानसभा घेराव के लिए निकले हजारों शिक्षक, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
छत्तीसगढ़ में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे राज्य अतिथि शिक्षक विद्या मितान संघ का प्रदर्शन अब और भी तेज हो गया है। दुर्ग में चल रहे अनिश्चितकालीन हड़ताल के 13वें दिन प्रदेश भर से जुटे एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए विधानसभा घेराव के लिए पैदल मार्च निकाला। इस दौरान जेल चौक पर तैनात पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी गहमागहमी और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।
प्रदर्शनकारी शिक्षक अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए जेल चौक पर पहले ही बैरिकेडिंग कर दी थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। बातचीत के बावजूद जब कोई ठोस सहमति नहीं बनी, तो शिक्षकों ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया।
अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- नियमितीकरण: वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी नियुक्ति दी जाए।
- समान काम का समान वेतन: वेतन विसंगतियों को दूर कर उचित पारिश्रमिक मिले।
- सेवा सुरक्षा: भविष्य सुरक्षित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
- स्थायी रोजगार: साल भर के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित हो।
11 साल की सेवा, फिर भी भविष्य अधर में
आंदोलन में शामिल कांकेर की अतिथि शिक्षिका तुलसी कुमारी कश्यप ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि वे पिछले 11 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने बताया, “महज 20 हजार रुपये के मानदेय में घर चलाना मुश्किल हो गया है। ऊपर से हमें साल में केवल 10 महीने का ही वेतन मिलता है। इतने वर्षों की सेवा के बावजूद आज भी हमारा भविष्य सुरक्षित नहीं है।”
बस्तर और सरगुजा तक शिक्षा व्यवस्था का आधार
विद्या मितान संघ का कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में, विशेषकर बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों में, शिक्षा व्यवस्था इन्हीं अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही है। ये शिक्षक वर्षों से अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन सरकार उनके योगदान को नजरअंदाज कर रही है।
| मुद्दा | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| हड़ताल की अवधि | 13 दिन (1 जुलाई से जारी) |
| प्रभावित क्षेत्र | प्रदेश भर के सरकारी स्कूल |
| मुख्य चिंता | नियमितीकरण का अभाव और कम मानदेय |
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
शिक्षकों की इस हड़ताल का सीधा असर प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन पर पड़ रहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि विधानसभा सत्र के दौरान उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे। फिलहाल, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।









