दो दशक बाद पांचना बांध में रौनक: नहरों में पानी की सफल बहाली
राजस्थान के करौली स्थित पांचना बांध से जुड़ी एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। करीब 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बांध की नहरों में नियमित जलापूर्ति की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है। गुरुवार को अधिकारियों की मौजूदगी में स्लूस गेटों की मरम्मत के बाद कमांड एरिया, नदी प्रवाह क्षेत्र और गुडला-पांचना लिफ्ट परियोजना की नहरों में पानी छोड़कर एक सफल टेस्ट रन पूरा किया गया। पूजा-अर्चना के साथ गेट खोले गए और तकनीकी रूप से इसे पूरी तरह सफल घोषित किया गया।
सफल परीक्षण के दौरान मौजूद रहे प्रशासनिक अधिकारी
इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासनिक और तकनीकी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया, जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.के. अग्रवाल, करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा, एसपी लोकेश सोनवाल और सवाई माधोपुर कलेक्टर कानाराम ने स्वयं स्थिति का जायजा लिया। गुडला पांचना संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में गेटों को क्रमवार तरीके से खोला गया। सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
तकनीकी खामियों का समाधान और संघर्ष का अंत
गौरतलब है कि 6 जुलाई को लगभग 20 साल बाद पहली बार नहरों में पानी छोड़ने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्लूस गेटों में आई तकनीकी खराबी के कारण पानी की निकासी संतोषजनक नहीं थी। किसानों ने इसके विरोध में जमकर प्रदर्शन और जाम लगाए थे। इस स्थिति को देखते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने हस्तक्षेप किया।
- मथुरा, देवली और मुंबई से विशेष तकनीशियनों और डाइवर्स को बुलाया गया।
- विशेषज्ञों की टीम ने दिन-रात काम कर स्लूस गेटों की मरम्मत पूरी की।
- मंत्रियों के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त किया था।
किसानों की समृद्धि का नया अध्याय
इस जलापूर्ति की बहाली से क्षेत्र के किसानों में भारी उत्साह है। ग्राम उत्थान समिति के अध्यक्ष रघुवीर मीणा ने बताया कि इस पहल से क्षेत्र में सालाना 200 करोड़ रुपये से अधिक के कृषि कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है। किसानों ने प्रशासन से भविष्य में इन गेटों को मोटराइज्ड और पूरी तरह स्वचालित बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो।
अधिकारियों का बयान
संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि सभी तकनीकी खामियों को दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सफल टेस्ट रन के बाद अब कमांड एरिया, नदी प्रवाह क्षेत्र और लिफ्ट परियोजना से जुड़े किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध पानी मिल सकेगा, जो इस पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल समय अंतराल | 20 साल |
| मुख्य समस्या | स्लूस गेटों में तकनीकी खराबी |
| संभावित कृषि लाभ | 200 करोड़ रुपये प्रति वर्ष |
| वर्तमान स्थिति | सफल टेस्ट रन संपन्न |
