अलवर: युवक के पैन कार्ड का सहारा लेकर 12 करोड़ का फर्जी कारोबार, कोर्ट के दखल के बाद FIR दर्ज
अलवर में नौकरी करने वाले एक साधारण सुपरवाइजर के पैन कार्ड का दुरुपयोग कर करीब 11.95 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार करने का मामला सामने आया है। पीड़ित अंकित यादव को इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब वह अपना खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के पास पहुंचा। जांच में खुलासा हुआ कि अंकित के पैन कार्ड पर दिल्ली की एक फर्म बिना उसकी जानकारी के जीएसटी नंबर चला रही है। कोर्ट के आदेश पर अरावली विहार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
मालवीय नगर स्थित एक कृषि कंपनी में बतौर सुपरवाइजर कार्यरत अंकित यादव का मासिक वेतन महज 10 हजार रुपये है। अंकित ने बताया कि अप्रैल महीने में जब वह सीए के पास अपनी व्यावसायिक योजना के लिए सलाह लेने गए, तो ऑनलाइन वेरिफिकेशन के दौरान पता चला कि उनके पैन कार्ड पर पहले से ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन सक्रिय है। विस्तृत जांच करने पर सामने आया कि दिल्ली स्थित ‘आकांक्षा सिंथेटिक्स’ नाम की फर्म उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर रही है।
दो साल में किया करोड़ों का लेनदेन
पीड़ित के अनुसार, उनके नाम का इस्तेमाल कर पिछले दो वित्तीय वर्षों में भारी-भरकम लेनदेन किया गया है:
- वित्तीय वर्ष 2023-24: 2 करोड़ 62 लाख 15 हजार 452 रुपये।
- वित्तीय वर्ष 2024-25: 9 करोड़ 33 लाख 56 हजार 142 रुपये।
- कुल कारोबार: लगभग 11 करोड़ 95 लाख 71 हजार 594 रुपये।
अंकित ने स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र बैंक खाता अलवर के पंजाब नेशनल बैंक में है, जबकि इस फर्जी कारोबार के लिए दिल्ली के पीतमपुरा स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के खाते का उपयोग किया गया है। साथ ही, जीएसटी रिकॉर्ड में उनके नाम पर दर्ज मोबाइल नंबर भी उनके नहीं हैं।
पुलिस की कार्रवाई
स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। एसीजेएम कोर्ट नंबर-3 के आदेश पर 29 जुलाई को अरावली विहार थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। एडिशनल एसपी दीपक कुमार ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है कि आखिर किसके इशारे पर और कैसे अंकित के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर इतने बड़े स्तर पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन और वित्तीय लेनदेन को अंजाम दिया गया।
गौरतलब है कि राजस्थान में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहां गरीब लोगों के दस्तावेजों का लालच देकर या धोखे से इस्तेमाल कर शराब माफिया और अन्य कंपनियां सरकारी खजाने को चूना लगा रही हैं। इससे पहले भी प्रदेश में गरीबों के नाम पर करोड़ों के शराब ठेके लेने और उन पर भारी टैक्स बकाया होने के मामले उजागर हो चुके हैं।










