पेपर लीक और सुशासन: अशोक गहलोत का सरकार पर बड़ा हमला
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में पेपर लीक की घटनाओं पर सरकार के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यदि प्रशासनिक प्रबंधन दुरुस्त नहीं हुआ, तो भविष्य में भी पेपर लीक की घटनाएं जारी रहेंगी। जयपुर स्थित अपने सिविल लाइंस आवास पर मीडिया से चर्चा करते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार पेपर लीक रुकने का श्रेय ले रही है, जबकि हकीकत यह है कि यह सब पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए सख्त कानूनों और प्रक्रिया में किए गए बदलावों का परिणाम है।
कानून की सख्ती बनाम प्रशासनिक विफलता
लोकसभा में नकल विरोधी विधेयक पारित होने पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि सरकार को विपक्ष से सलाह मशविरा करके बिल लाना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में ही राजस्थान में नकल के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून बनाया गया था। गहलोत ने सरकार को आईना दिखाते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे:
- सख्त प्रावधान: कांग्रेस सरकार के कानून में आजीवन कारावास, नकल माफिया की संपत्ति जब्त करने और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान पहले से ही मौजूद है।
- मैनेजमेंट का अभाव: गहलोत ने जोर देकर कहा कि केवल कानून बनाने से अपराध नहीं रुकते; चोरी के खिलाफ भी कानून हैं, लेकिन चोरियां होती हैं। असली चुनौती प्रशासनिक प्रबंधन (मैनेजमेंट) की है।
- ओएमआर शीट घोटाला: उन्होंने आरोप लगाया कि ओएमआर शीट घोटाले में पकड़े गए आरोपियों को जमानत मिल रही है और सरकार इस दिशा में प्रभावी पैरवी करने में विफल रही है।
सुशासन और राजनीतिक भविष्य पर तंज
अगले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी का दावा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार को सुशासन पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “अगली बार कांग्रेस की सरकार बनना निश्चित है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता के पांच साल बर्बाद न हों। वर्तमान में जिस तरह से सरकार चल रही है, उसकी चर्चा हर गांव और घर में है। मुख्यमंत्री को यह पता लगवाना चाहिए कि यह चर्चा सकारात्मक है या नकारात्मक। यदि कुशासन का यही दौर रहा, तो अंततः नुकसान आम जनता का ही होगा।”
राहुल गांधी का माइक बंद होने का मुद्दा
संसद में राहुल गांधी के माइक बंद होने के विवाद पर भी गहलोत ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर भले ही यह कहें कि माइक का बटन उनके हाथ में नहीं है, लेकिन सदन का संचालन उनकी देखरेख में ही होता है। गहलोत ने आरोप लगाया, “माइक बंद करने का बटन भले ही टेबल पर न हो, लेकिन अधिकारियों को जो निर्देश या इशारे दिए जाते हैं, उसी के तहत माइक बंद किया जाता है। यह एक कड़वा सच है कि राहुल गांधी के बोलते समय माइक बंद कर दिया जाता है।”










