Cyber ठगी का डर: घर-घर जाकर नंबर मांगने पर ग्रामीणों का हंगामा


राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कुछ अज्ञात लोग घर-घर जाकर ग्रामीणों से उनके मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने लगे। अपनी निजी जानकारी साझा करने को लेकर ग्रामीणों ने डिजिटल ठगी की आशंका जताते हुए तुरंत सदर थाना पुलिस को सूचित किया। मौके…

नागौर में डेटा कलेक्शन को लेकर मचा बवाल, ग्रामीणों को सताया साइबर ठगी का डर

राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कुछ अज्ञात लोग घर-घर जाकर ग्रामीणों से उनके मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने लगे। अपनी निजी जानकारी साझा करने को लेकर ग्रामीणों ने डिजिटल ठगी की आशंका जताते हुए तुरंत सदर थाना पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने डेटा जुटा रहे नाबालिग बच्चों और उनके साथ मौजूद व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सर्वे के पीछे का असली मकसद क्या था और क्या इसमें किसी तरह की सुरक्षा चूक हुई है।

क्या है पूरा मामला और ग्रामीणों का संदेह?

गांव में सर्वे करने पहुंचे लोगों में मुख्य रूप से नाबालिग बच्चे शामिल थे, जो घर-घर जाकर एक कागज पर ग्रामीणों का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे थे। जब जागरूक ग्रामीणों ने बच्चों से उनके आधार कार्ड, परिचय पत्र और इस सर्वे के आधिकारिक उद्देश्य के बारे में सवाल किए, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या प्रशासन की अनुमति के निजी डेटा एकत्र करना सीधे तौर पर साइबर धोखाधड़ी को न्योता देना है, जिससे पूरे गांव में सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल बन गया।

‘गौ सेवा अभियान’ का दावा, लेकिन सवालों के घेरे में तरीका

पूछताछ के दौरान बच्चों के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने सफाई देते हुए इसे ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ का हिस्सा बताया। उसने दावा किया कि गाय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग को लेकर यह हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है और 27 जुलाई को जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाना है। हालांकि, ग्रामीणों ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। उनका तर्क है कि यदि यह एक सामाजिक अभियान था, तो भी बिना उचित पहचान और सरकारी अनुमति के लोगों की व्यक्तिगत जानकारी लेना संदिग्ध है।

पुलिस की जांच और स्कूल प्रशासन की भूमिका

सूचना मिलने पर एएसआई रमेश और उनकी टीम ने मौके से सभी बच्चों को सदर थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ कि ये सभी बच्चे कामधेनु स्कूल के हॉस्टल में रहने वाले छात्र हैं। इस जानकारी के बाद स्कूल संचालक भी थाने पहुंचे और पुलिस को अभियान के संबंध में अपना पक्ष रखा। पुलिस अब निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है:

  • सर्वे करने वाली संस्था का क्या आधिकारिक पंजीकरण है?
  • नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल डेटा जुटाने के लिए क्यों किया जा रहा था?
  • एकत्र किए गए डेटा का उपयोग किस उद्देश्य से और किसके द्वारा किया जाना था?
  • क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्राइवेसी पॉलिसी का उल्लंघन हुआ है?

फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रशासन से आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे संदिग्ध सर्वे पर रोक लगाई जाए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की आर्थिक या डिजिटल धोखाधड़ी से बचा जा सके।