बालोद में शिक्षक की करतूत: देरी से कक्षा में लौटने पर छात्र को पीटा, सिर दीवार पर दे मारा
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक 12 वर्षीय छात्र के साथ शिक्षक द्वारा बर्बरता करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। डौंडीलोहारा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में तैनात शिक्षक लोकेश्वर निषाद पर सातवीं कक्षा के छात्र के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित छात्र के पिता प्रमोद साहू की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ बीएनएस (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। यह घटना 20 जुलाई को हुई थी, जिसके बाद से छात्र सदमे में है और स्कूल जाने से कतरा रहा है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई घटना?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 20 जुलाई को छुट्टी के बाद छात्र अपनी कक्षा में वापस गया था। बाथरूम ब्रेक के दौरान कक्षा में लौटने में उसे मात्र एक मिनट की देरी हुई। आरोप है कि इसी मामूली सी बात पर शिक्षक लोकेश्वर निषाद आपा खो बैठे और उन्होंने न केवल छात्र को अपशब्द कहे, बल्कि बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। शिकायत में बताया गया है कि शिक्षक ने छात्र के सीने पर जोरदार वार किया और उसका सिर दीवार से टकरा दिया, जिससे बच्चे को गंभीर चोटें आई हैं।
चोट के निशान और उपचार की स्थिति
मारपीट के बाद छात्र के सिर में सूजन आ गई और उसे असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा। घर पहुंचने पर जब बच्चे ने अपने रिश्तेदारों को आपबीती बताई, तो पहले घरेलू उपचार किया गया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर 21 जुलाई को उसे डौंडीलोहारा के शासकीय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने छात्र की जांच कर आवश्यक उपचार प्रदान किया। घटना के समय कक्षा में मौजूद अन्य सहपाठियों ने भी शिक्षक की इस अमानवीय हरकत को अपनी आंखों से देखा है।
पुलिस कार्रवाई और शिक्षक संगठनों का रुख
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- कानूनी धाराएं: आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 296 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- जांच प्रक्रिया: डौंडीलोहारा थाना प्रभारी सुनील तिर्की ने स्पष्ट किया है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- शिक्षक संगठनों का विरोध: एफआईआर दर्ज होने के बाद स्थानीय शिक्षक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका तर्क है कि पुलिस कार्रवाई से पहले विभागीय जांच होनी चाहिए थी। संगठनों ने इस मामले को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
वर्तमान में पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। वहीं, इस घटना के बाद से पीड़ित छात्र मानसिक रूप से इतना डर गया है कि उसने स्कूल जाने से साफ इनकार कर दिया है। शिक्षा विभाग भी इस मामले में अब रिपोर्ट तलब कर सकता है, क्योंकि स्कूल परिसर में इस तरह की हिंसा छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।








