शाजापुर में जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
मध्य प्रदेश के शाजापुर में कृषि उपज मंडी के पीछे स्थित जर्जर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया है। मंगलवार को जिले के दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीण एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के लिए सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद काम शुरू नहीं किया जा रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
इन गांवों के लोग हैं प्रभावित
यह सड़क मुख्य रूप से शाजापुर शहर को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ने वाली लाइफलाइन मानी जाती है। प्रदर्शन में शामिल प्रमुख गांवों की सूची नीचे दी गई है:
- बमोरी, पिंदोनिया और पचोला
- रिछोदा, मेंहदी और लड़ावद
- खेड़ा बमोरी, पिंदोनिया खेड़ा
- रामपुरा और मेवासा
घंटों का सफर और दुर्घटना का डर
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की खस्ताहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले जो दूरी तय करने में मात्र 15 मिनट का समय लगता था, अब उसे पूरा करने में एक घंटे से अधिक का समय लग रहा है। सड़क पूरी तरह से गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस के लिए भी यह रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं है, जिससे समय पर इलाज मिलने में देरी हो रही है।
प्रशासन का आश्वासन, ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीण राजपाल सिंह ने बताया कि वे पिछले 14 वर्षों से इस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं और हर दिन बदहाल सड़क के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन सौंपने के बाद जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि एक महीने के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| मुख्य समस्या | कृषि उपज मंडी के पीछे की जर्जर सड़क |
| प्रभावित गांव | 10 से 12 गांव |
| प्रशासन का रुख | एक माह में काम शुरू करने का आश्वासन |
| ग्रामीणों की चेतावनी | समय सीमा में काम न होने पर उग्र आंदोलन |
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे करणी सेना परिवार और अन्य संगठनों के साथ मिलकर कलेक्ट्रेट पर बड़ा धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने वादे पर कितना खरा उतरता है।









