सतना स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: अस्तित्वहीन उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हुआ कर्मचारी, वेतन भी जारी
मध्य प्रदेश के सतना जिले के स्वास्थ्य विभाग में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विभाग की कार्यप्रणाली पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (MPW) की पदस्थापना ऐसे उप स्वास्थ्य केंद्र पर कर दी गई, जिसका जिले में कोई वजूद ही नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कागजों में मौजूद इस फर्जी केंद्र पर न केवल कर्मचारी ने कार्यभार ग्रहण किया, बल्कि उसे एक महीने का वेतन भी जारी कर दिया गया।
इस पूरे मामले की शिकायत युवक कांग्रेस नेता शैलेश तिवारी ने कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से की है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताया है।
स्थानांतरण नीति 2026 की धज्जियां, नियमों को ताक पर रखा
शिकायत के अनुसार, स्थानांतरण नीति-2026 के तहत सीएमएचओ कार्यालय द्वारा एमपीडब्ल्यू हिमांशु धवाई का तबादला रामपुर बाघेलान ब्लॉक के उप स्वास्थ्य केंद्र सराय से हटाकर सीएचसी कोठी के अंतर्गत आने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र माधवगढ़ में किया गया था। यह आदेश प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद जारी हुआ था, लेकिन धरातल पर जो स्थिति सामने आई, उसने विभाग के दावों की पोल खोल दी है।
- अस्तित्वहीन केंद्र: शिकायतकर्ता का दावा है कि माधवगढ़ में ऐसा कोई उप स्वास्थ्य केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत ही नहीं है।
- भवन का अभाव: वहां न तो कोई सरकारी भवन है और न ही स्वास्थ्य विभाग की कोई गतिविधि संचालित होती है।
- सरकारी रिकॉर्ड में नाम नहीं: आधिकारिक दस्तावेजों में भी इस नाम के केंद्र का कोई उल्लेख नहीं मिलता है।
वेतन भुगतान पर उठे गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित उप स्वास्थ्य केंद्र का कोई भौतिक अस्तित्व ही नहीं है, तो वहां कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? सूत्रों की मानें तो संबंधित कर्मचारी वर्तमान में सीएमएचओ कार्यालय में अटैच होकर काम कर रहा है। आरोप है कि कर्मचारी को शहर से बाहर जाने से बचाने के लिए विभाग के अधिकारियों ने कागजी खेल खेला और उसे अस्तित्वहीन केंद्र पर पोस्टिंग दिखाकर वेतन भी निकाल लिया।
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
इस पूरे मामले पर जब जिले के सीएमएचओ से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने इसे टाइपिंग एरर (टंकण त्रुटि) होने की संभावना जताई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
