श्योपुर में गुरु पूर्णिमा पर विवाद: दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं ने वनकर्मियों पर लगाया मारपीट का आरोप
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में गुरु पूर्णिमा के मौके पर धोरेट सरकार मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। अगरा थाना क्षेत्र की तालबाली चौकी के पास हुई इस घटना का एक वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद हड़कंप मच गया है। श्रद्धालुओं ने वनकर्मियों पर मारपीट, गाली-गलौज और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है, वहीं वन विभाग ने इन दावों को पूरी तरह से निराधार बताया है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित श्रद्धालुओं में शामिल सोनू कुशवाह ने अपनी शिकायत में बताया कि वे अपने साथियों विवेक गुर्जर, लवकुश कुशवाह और सुग्रीव कुशवाह के साथ बाइक से मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे। रास्ते में तालबाली चौकी के समीप डिप्टी रेंजर केशव बंसल और उनके साथ मौजूद अन्य वनकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। सोनू का आरोप है कि बिना किसी पूछताछ के वनकर्मियों ने डंडों से उनकी बाइक और उनके साथ मारपीट की। साथ ही, उन्हें गाली-गलौज करते हुए मांस तस्करी या अन्य झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी गई।
वन विभाग और पुलिस का पक्ष
आरोपों के बीच वन विभाग ने अपना बचाव किया है। श्योपुर के डीएफओ आर. थिरकुरल ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में मारपीट जैसी कोई स्पष्ट घटना नजर नहीं आ रही है। उन्होंने बताया कि वन विभाग का गेट बंद होने के कारण सुरक्षा कारणों से श्रद्धालुओं को रोका गया था। बाद में जब वे दूसरे रास्ते से जाने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें वापस लौटाया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अगरा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस संबंध में थाना प्रभारी धर्मेंद्र शर्मा ने जानकारी दी कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई गई है। आपसी सहमति और समझाइश के बाद मामला फिलहाल शांत हो गया है।
घटना के मुख्य बिंदु
- स्थान: अगरा थाना क्षेत्र, तालबाली चौकी (श्योपुर)।
- आरोप: श्रद्धालुओं ने वनकर्मियों पर डंडों से पिटाई और झूठे केस में फंसाने की धमकी का आरोप लगाया।
- वन विभाग का तर्क: गेट बंद होने के कारण प्रवेश रोका गया था, मारपीट के आरोप गलत हैं।
- वर्तमान स्थिति: पुलिस की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया है।
