सिंगरौली: 2 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक 75 करोड़ के भुगतान के लिए परेशान
सिंगरौली जिले में तेंदूपत्ता संग्राहकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वन विभाग द्वारा राशि जारी किए जाने के बावजूद, जिले के 2 लाख से अधिक संग्राहकों को पिछले दो महीनों से उनकी मेहनत की कमाई नहीं मिल पाई है। कुल 75 करोड़ रुपए की यह राशि बैंकों में अटकी पड़ी है, जिसके कारण हजारों गरीब परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अपनी बकाया राशि प्राप्त करने के लिए मजदूर लगातार स्थानीय समितियों और बैंकों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल निराशा ही हाथ लग रही है। इस समस्या के कारण किसानों और मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बुआई के सीजन में आर्थिक तंगी की मार
लघु वन उपज संगठन के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इदरीश ने बताया कि विभाग ने नियमानुसार 75 समितियों के माध्यम से भुगतान की राशि बैंकों में जमा करवा दी थी। वर्तमान में खरीफ की फसलों की बुआई का सीजन चल रहा है, जिसके चलते किसानों को खाद और बीज खरीदने के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। समय पर भुगतान न मिलने के कारण अब उन्हें मजबूरन ऊंची ब्याज दरों पर साहूकारों से उधार लेना पड़ रहा है।
समस्या का सारांश
| विवरण | आंकड़े/स्थिति |
|---|---|
| प्रभावित संग्राहक | 2 लाख से अधिक |
| लंबित भुगतान राशि | 75 करोड़ रुपए |
| विलंब की अवधि | 2 महीने |
| मुख्य कारण | बैंक स्तर पर तकनीकी देरी |
प्रशासन ने दिया जल्द भुगतान का आश्वासन
तेंदूपत्ता संग्राहकों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। अपर कलेक्टर एस. त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि भुगतान में हो रही देरी के कारणों का पता लगाने के लिए बैंकों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि प्रशासन जल्द ही बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करेगा ताकि मजदूरों के बैंक खातों में लंबित राशि का भुगतान बिना किसी और देरी के सुनिश्चित किया जा सके।
- बैंकों से समन्वय: प्रशासन जल्द ही नोडल अधिकारियों के साथ बैठक करेगा।
- समस्या का समाधान: तकनीकी खामियों को दूर कर सीधे खातों में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश।
- निगरानी: जिला प्रशासन द्वारा पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी जा रही है।
