रायपुर में खैर की लकड़ियों का जखीरा बरामद, जांच का दायरा बढ़ा
रायपुर के उरला-तेंदुआ क्षेत्र में वन विभाग की कार्रवाई ने अवैध तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। एक गोदाम से भारी मात्रा में खैर की अवैध लकड़ियां जब्त की गई हैं। बरामद लकड़ियों की तादाद इतनी अधिक है कि दो रातें बीत जाने के बाद भी वन विभाग की टीम गिनती पूरी नहीं कर पाई है। अधिकारियों का अनुमान है कि कल सुबह तक ही इन लकड़ियों की सटीक संख्या का पता चल पाएगा।
मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल की बढ़ेंगी मुश्किलें
इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल पर वन विभाग ने शिकंजा कस दिया है। विभाग अब आरोपी की काली कमाई और संपत्तियों की गहन जांच की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आयकर (IT) और GST विभाग को औपचारिक पत्र भेजकर आर्थिक गतिविधियों का ब्योरा मांगा गया है। मनीष अग्रवाल का आपराधिक इतिहास काफी पुराना रहा है, जिस पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में खैर और बहुमूल्य वन उत्पादों की तस्करी के आधा दर्जन से अधिक मामले पहले से ही दर्ज हैं।
जांच में हुआ हरियाणा और राजस्थान कनेक्शन का खुलासा
वन विभाग ने गोदाम के मुंशी इरफान का मोबाइल फोन जब्त कर उसे सह-आरोपी बनाया है। हालांकि, पूछताछ के बाद उसे फिलहाल छोड़ दिया गया है, लेकिन उसके मोबाइल की चैट्स ने तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क की पोल खोल दी है।
- लकड़ियों का गंतव्य: जब्त लकड़ियां मथुरा, हरियाणा और राजस्थान भेजी जानी थीं।
- प्रक्रिया: इन लकड़ियों को सुखाकर चूरा बनाया जाता है, जिससे बाद में कत्था तैयार किया जाता है।
गोदाम मालिक भी अनजान, 11 मार्च को हुआ था सौदा
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी मनीष अग्रवाल ने इस गोदाम को 11 मार्च 2026 को किराए पर लिया था, जिसका मासिक किराया 28 हजार रुपये तय हुआ था। जमीन के मालिक धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन्हें अग्रवाल के असली मंसूबों की कोई जानकारी नहीं थी।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गोदाम का स्थान | तेंदुआ (उरला के पास) |
| किराया | 28,000 रुपये प्रति माह |
| अनुबंध की तिथि | 11 मार्च 2026 |
धर्मवीर सिंह के अनुसार, आरोपी ने केवल गोदाम किराए पर लेने की बात कही थी और उसने अपने संदिग्ध बैकग्राउंड के बारे में उन्हें अंधेरे में रखा था। फिलहाल, वन विभाग इस मामले की कड़ियों को जोड़कर तस्करी के पूरे गिरोह तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
