मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में ‘यूथ क्लब’ के गठन की कवायद शुरू कर दी है। इस पहल के तहत राज्य सरकार ने 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं का डेटा जुटाने और उन्हें ‘माई भारत’ (MY Bharat) पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं की नेतृत्व क्षमता को निखारना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ना है। प्रशासन ने 15 अगस्त तक शत-प्रतिशत पंजीयन पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
अभियान का उद्देश्य और प्रक्रिया
पंचायत विभाग द्वारा संचालित इस अभियान का मकसद युवाओं को संगठित कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। पंजीयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकार युवाओं के कौशल को पहचानकर उन्हें स्वयं सेवा और विभिन्न विकास कार्यों में शामिल करेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पंजीकरण युवाओं के भविष्य के अवसरों और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजनीतिक घमासान: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
युवाओं के इस डेटा संग्रह को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे ‘डिजिटल निगरानी’ करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इस डेटा का उपयोग युवाओं को प्रभावित करने और उन पर अपनी विचारधारा थोपने के लिए करना चाहती है। पार्टी का दावा है कि सरकार मौजूदा ‘जेन-जेड’ (Gen Z) आंदोलनों से डरी हुई है, इसलिए वह युवाओं की गतिविधियों पर नजर रखना चाहती है।
भाजपा का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इसे विकास विरोधी मानसिकता बताया है। भाजपा नेताओं ने सवाल किया कि युवाओं के सशक्तिकरण के अभियान से कांग्रेस को परेशानी क्यों हो रही है? भाजपा का तर्क है कि सरकार के पास पहले से ही नागरिकों का डेटा उपलब्ध होता है, और यह अभियान पूरी तरह से युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि सरकार और संगठन का काम करने का तरीका अलग-अलग है और यह कवायद केवल युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए है।
