जबलपुर: शारीरिक चुनौतियों को मात देकर डिप्टी कलेक्टर बने हिमांशु सोनी, पहले दिन जनसुनवाई में संभाला कामकाज
जबलपुर के रहने वाले हिमांशु सोनी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट मेहनत के दम पर सफलता की एक नई मिसाल कायम की है। 78% अस्थि दिव्यांग और 20% दृष्टिबाधित होने के बावजूद हिमांशु ने MPPSC 2024 परीक्षा में प्रदेश में 13वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर का पद प्राप्त किया है। दिव्यांग श्रेणी में उन्होंने पूरे मध्य प्रदेश में पहला स्थान पाया है। मंगलवार को उन्होंने जबलपुर कलेक्ट्रेट में अपनी नई पारी की शुरुआत की, जहां वे व्हीलचेयर पर सवार होकर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे और जनसुनवाई में बैठकर आम जनता की समस्याओं को सुना।
बिना कोचिंग घर से की तैयारी, दूसरे प्रयास में मिली सफलता
हिमांशु सोनी की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़ा लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने अपनी पूरी तैयारी बिना किसी ऑफलाइन कोचिंग के घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यमों से की। साक्षात्कार के लिए उन्हें केवल एक बार इंदौर जाना पड़ा था। यह उनकी डिप्टी कलेक्टर बनने की दिशा में दूसरी कोशिश थी, जबकि इससे पहले वे स्कूल सहायक संचालक के पद पर भी चयनित हो चुके थे। हिमांशु की इस उपलब्धि में उनके परिवार का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण रहा, जिन्होंने उनकी हर शैक्षिक आवश्यकता को पूरा किया और उन्हें मानसिक रूप से हमेशा मजबूत बनाए रखा।
संघर्ष से भरी रही जीवन की शुरुआत
हिमांशु के पिता महेश कुमार सोनी, जो एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, बताते हैं कि हिमांशु के जन्म के समय से ही उनके सामने शारीरिक चुनौतियां थीं। उनके हाथ-पैर पूरी तरह विकसित नहीं थे, लेकिन माता-पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने हिमांशु की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए स्कूल में विशेष फर्नीचर की व्यवस्था की गई। हिमांशु की दिनचर्या बेहद अनुशासित थी; जहां अन्य बच्चे खेल-कूद में समय बिताते थे, वहीं हिमांशु अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करते थे।
मेहनत और लगन का मिला शानदार परिणाम
हिमांशु की शैक्षणिक योग्यता उनकी लगन का प्रमाण है। उन्होंने अपनी शिक्षा के हर पड़ाव पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है:
- 10वीं कक्षा: 86.75% अंक।
- 12वीं कक्षा: 87.5% अंक।
- ग्रेजुएशन: 78% अंक।
अपने बेटे की इस कामयाबी पर पिता महेश कुमार सोनी भावुक होकर कहते हैं कि यह उनके जीवन का सबसे गौरवान्वित क्षण है। हिमांशु सोनी का संदेश स्पष्ट है—असफलता से घबराना नहीं चाहिए। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति निरंतर अभ्यास, कठिन मेहनत और स्वयं पर विश्वास रखे, तो कोई भी शारीरिक या बाहरी बाधा उसकी सफलता की राह नहीं रोक सकती।
