Skill: बच्चों ने सीखा आत्मनिर्भर बनना, स्कूल में बनाई मोमबत्ती और राखियां


किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए महिला अधिकार मंच ने मंगलवार को शिर्डी साईं हाई स्कूल में एक विशेष स्किल डेवलपमेंट कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जहाँ…

स्कूली बच्चों को हुनरमंद बनाने की पहल: शिर्डी साईं हाई स्कूल में आयोजित हुई स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप

किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए महिला अधिकार मंच ने मंगलवार को शिर्डी साईं हाई स्कूल में एक विशेष स्किल डेवलपमेंट कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जहाँ उन्हें रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से हुनरमंद बनने का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों में छिपी प्रतिभा को बाहर निकालना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि आज के दौर में किताबी पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल का होना भी बेहद जरूरी है। यदि बच्चे बचपन से ही अपने हाथों से काम करना और नई कलाएं सीखना शुरू कर दें, तो आगे चलकर यही कौशल उनके लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन जरिया बन सकते हैं।

हुनर को रोजगार से जोड़ने की सीख

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्किल डेवलपमेंट की महत्ता के बारे में विस्तार से समझाया गया। उन्हें प्रेरित किया गया कि वे अपनी रचनात्मकता को केवल शौक तक सीमित न रखें, बल्कि उसे एक पेशेवर कौशल के रूप में विकसित करें। इस सत्र के दौरान निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियों पर प्रशिक्षण दिया गया:

  • कैंडल और सोप मेकिंग: मोमबत्ती और साबुन बनाने की वैज्ञानिक व कलात्मक प्रक्रिया।
  • राखी निर्माण: रक्षाबंधन के लिए आकर्षक और पर्यावरण के अनुकूल राखियां बनाना।
  • दीया सजावट: दीपावली के लिए मिट्टी के दीयों को कलात्मक रूप से सजाना।

आत्मनिर्भरता का संकल्प और रचनात्मकता का विकास

प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने बेहद उत्साह के साथ भाग लिया और खुद से कई सुंदर वस्तुएं तैयार कीं। इस दौरान विद्यार्थियों ने एक महत्वपूर्ण संकल्प लिया कि वे आने वाले रक्षाबंधन और दीपावली जैसे त्योहारों पर बाजार से बनी वस्तुओं के बजाय अपने हाथों से निर्मित राखियों और सजावटी दीयों का ही उपयोग करेंगे। यह न केवल उनकी रचनात्मकता को बढ़ाएगा, बल्कि उनमें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी पैदा करेगा।

आयोजकों और विद्यालय का संयुक्त प्रयास

आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व विकास में मील का पत्थर साबित होते हैं। इससे छात्रों में नई चीजें सीखने की ललक पैदा होती है और वे भविष्य के प्रति अधिक सकारात्मक और आत्मनिर्भर बनते हैं। इस सफल आयोजन में शिर्डी साईं हाई स्कूल के प्रबंधन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के समापन पर स्कूल प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कौशल विकास कार्यक्रमों को जारी रखने की बात कही गई। इस अवसर पर महिला अधिकार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति सिंह, जिला अध्यक्ष पूजा मंगतानी, सचिव निशिका लालवानी, उप सचिव कोमल जैन, कोषाध्यक्ष मेघना सिंह, समन्वयक रंजना कालरा, विंग्स अकैडमी की संस्थापक निकिता खुबचंदानी और शिर्डी साईं हाई स्कूल की प्राचार्य प्रियंका शांडिल्य सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


Exit mobile version