अमरकंटक में गुरु पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: 20 हजार श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा में लगाई डुबकी
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले स्थित आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में बुधवार को आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा के पवित्र घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई। ब्रह्ममुहूर्त से ही तीर्थ नगरी के कोटितीर्थ कुंड और रामघाट पर भक्तों का तांता लगा रहा, जहाँ लोगों ने विश्व शांति और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की।
गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन
गुरु पूर्णिमा के मौके पर अमरकंटक के विभिन्न आश्रमों में गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत झलक देखने को मिली। शिष्यों ने अपने गुरुदेवों के चरणों में पुष्प, चंदन और अक्षत अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया। दिनभर आश्रमों में वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। श्रद्धालुओं ने गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय मानकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
इन आश्रमों में रहे विशेष आयोजन
पर्व के उपलक्ष्य में नगर के प्रमुख आश्रमों में विशेष गुरुपूजन और अनुष्ठान संपन्न हुए। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित स्थल शामिल रहे:
- कल्याण सेवा आश्रम और शांति कुटी आश्रम
- फलाहारी आश्रम और गीता स्वाध्याय मंदिर
- बर्फानी आश्रम, मृत्युंजय आश्रम और धारकुंडी आश्रम
- गायत्री मंदिर (सर्वोदय विश्राम गृह)
पूजन कार्यक्रमों के बाद इन सभी आश्रमों में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।
गुरु का आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा को ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। आश्रम से जुड़े साधकों का कहना है कि गुरु का मार्गदर्शन मनुष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर विवेक और सदाचार का प्रकाश फैलाता है। सद्गुरु की शिक्षाएं करुणा, नम्रता और सेवा का मार्ग प्रशस्त करती हैं, जो जीवन को सार्थकता प्रदान करने का आधार हैं। मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से आए भक्तों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक भव्य स्वरूप प्रदान किया।
