कटनी: महज एक घंटे की बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, घरों में घुसा पानी
कटनी जिले के बड़वारा ग्राम में हुई महज एक घंटे की तेज बारिश ने स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के विकास के दावों को पूरी तरह से खोखला साबित कर दिया है। पहली ही जोरदार बारिश के कारण जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और पानी सीधे ग्रामीणों के घरों के भीतर घुस गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इमामबाड़ा क्षेत्र बना टापू, गृहस्थी हुई तबाह
इस बारिश की सबसे भीषण मार बड़वारा के इमामबाड़ा क्षेत्र पर पड़ी है। जलजमाव के कारण यहां के हालात इतने भयावह हो गए कि स्थानीय निवासी जान मोहम्मद के घर में घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया। परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते घर में रखा कीमती अनाज पूरी तरह बर्बाद हो गया। इतना ही नहीं, बच्चों की स्कूल की कॉपियां और किताबें पानी में तैरती नजर आईं, जिससे परिवार को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।
पीड़ितों के अनुसार, यह स्थिति अचानक नहीं बनी है, बल्कि नाली निर्माण में बरती गई भारी अनियमितता और लंबे समय से सफाई न होने का परिणाम है।
प्रशासनिक उदासीनता पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि यह आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही है। मानसून आने से पहले ही उन्होंने स्थानीय सरपंच और पंचायत प्रशासन से नालियों की सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की गुहार लगाई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
- नाली का निर्माण: पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा बनाई गई नाली में निकासी का कोई ठोस रास्ता नहीं।
- समय पर अनदेखी: मानसून से पहले दी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- आर्थिक नुकसान: अनाज और शैक्षणिक सामग्री के खराब होने से परिवारों को गहरा झटका।
अधिकारियों और पंचायत का पक्ष
इस मामले पर सफाई देते हुए बड़वारा की सरपंच सुनैना सिंह ने कहा कि संबंधित नाली का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया था, जिसमें तकनीकी खामियां हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत ने मानसून से पूर्व पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर सुधार की मांग की थी। वहीं, दूसरी ओर क्षेत्रीय अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा है:
| अधिकारी का नाम | आश्वासन |
|---|---|
| विवेक श्रीवास्तव (क्षेत्रीय अधिकारी) | तकनीकी टीम जल्द मौके का निरीक्षण करेगी और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। |
फिलहाल, ग्रामीण अब प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि भविष्य में उन्हें दोबारा इस जल-संकट का सामना न करना पड़े।
