UCC: ‘नाजायज’ का ठप्पा होगा खत्म, कैबिनेट से आज मिलेगी मंजूरी

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार आज जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) में एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है। इस बैठक में राज्य के भविष्य को प्रभावित करने वाले दो बड़े नीतिगत फैसलों पर चर्चा और मुहर लगने की पूरी संभावना है। सरकार का मुख्य फोकस समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में…

मध्यप्रदेश में बड़े प्रशासनिक और कानूनी बदलाव: कैबिनेट बैठक में UCC और मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर मुहर संभव

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार आज जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) में एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है। इस बैठक में राज्य के भविष्य को प्रभावित करने वाले दो बड़े नीतिगत फैसलों पर चर्चा और मुहर लगने की पूरी संभावना है। सरकार का मुख्य फोकस समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाना और चिकित्सा शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ करना है।

समान नागरिक संहिता (UCC): विवाह और बच्चों के अधिकारों में होंगे बड़े बदलाव

कैबिनेट के समक्ष रखे जा रहे UCC ड्राफ्ट के तहत कई क्रांतिकारी बदलावों का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्रदान करना है, जिसके तहत ‘नाजायज औलाद’ जैसी शब्दावली को कानून से पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी है। विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जा रहा है।

  • विवाह का पंजीयन: सभी समुदायों के लिए विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य होगा। हालांकि, पंजीयन के अभाव में विवाह को अमान्य नहीं ठहराया जाएगा।
  • तलाक के नियम: मुस्लिम तलाक, सामाजिक पंचायत या किसी भी गैर-कानूनी व्यवस्था से विवाह विच्छेद को मान्यता नहीं दी जाएगी।
  • महिला अधिकार: यदि विवाह के समय पति किसी अन्य महिला को गर्भवती कर चुका है, तो पत्नी को विवाह निरस्त कराने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
  • लिव-इन रिलेशनशिप: अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक माह के भीतर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
  • भरण-पोषण: संबंध टूटने की स्थिति में महिला पार्टनर को पत्नी के समान भरण-पोषण का हक मिलेगा।
  • ST वर्ग को छूट: अनुसूचित जनजातियों (ST) को उनकी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों के सम्मान में इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

मेडिकल यूनिवर्सिटी का पुनर्गठन: दो हिस्सों में बंटेगा चिकित्सा शिक्षा का तंत्र

प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी के कार्यभार को संतुलित करने के लिए सरकार इसे दो हिस्सों में विभाजित करने जा रही है। इस पुनर्गठन के बाद प्रशासनिक दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।

यूनिवर्सिटी क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र
उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन सहित मध्य और पश्चिम मध्यप्रदेश के सभी जिले।
जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी महाकौशल और विंध्य क्षेत्र (जबलपुर, रीवा, सतना, शहडोल, बालाघाट आदि)।

इस नई व्यवस्था के तहत भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, देवास, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर और सागर जैसे प्रमुख जिलों के मेडिकल कॉलेज अब उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन संचालित होंगे। वहीं, जबलपुर और रीवा संभाग के मेडिकल कॉलेज पहले की तरह जबलपुर यूनिवर्सिटी से ही संबद्ध रहेंगे।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद UCC संबंधी ड्राफ्ट को विधानसभा में एक विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा, जिससे प्रदेश में एक नई कानूनी व्यवस्था का सूत्रपात होगा।


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