दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को बनाया उम्मीदवार, लल्लूराम की खबर सच साबित

मध्य प्रदेश के दतिया में होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी आलाकमान ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को दतिया विधानसभा सीट से अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। उनके नाम पर मुहर लगते ही…

दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर जताया भरोसा, चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प

मध्य प्रदेश के दतिया में होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी आलाकमान ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को दतिया विधानसभा सीट से अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। उनके नाम पर मुहर लगते ही कांग्रेस ने इस संबंध में औपचारिक आदेश भी जारी कर दिया है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस संगठन ने घनश्याम सिंह के नाम का प्रस्ताव दिल्ली भेजा था, जिसे केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी मंजूरी दे दी है। पिछली बार राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई तकनीकी खामियों से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार बेहद सतर्क नजर आ रही है। पार्टी ने इस बार पूरी सावधानी बरतते हुए एक डमी कैंडिडेट के जरिए भी नामांकन फॉर्म भरवाया है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में चुनावी प्रक्रिया बाधित न हो।

राजघराने से ताल्लुक और राजनीतिक पृष्ठभूमि

घनश्याम सिंह का दतिया के स्थानीय राजनीति में बड़ा रसूख माना जाता है और वे दतिया राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। वे पूर्व में भी दतिया से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र की जनता के बीच एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सेवड़ा सीट से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी ने उन पर दोबारा विश्वास जताते हुए उन्हें फिर से दतिया के चुनावी समर में उतारा है।

उपचुनाव के प्रमुख बिंदु:

  • मुख्य मुकाबला: भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।
  • भाजपा की स्थिति: भाजपा ने मौजूदा सीट पर नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मौका दिया है, जिसके चलते पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आ रही हैं।
  • रणनीति: कांग्रेस ने पिछले अनुभवों से सीखते हुए इस बार बैकअप प्लान और डमी प्रत्याशी के साथ पूरी मजबूती से मैदान में उतरने की तैयारी की है।

दतिया की यह सीट न केवल दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई है, बल्कि यहां का परिणाम भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। एक ओर जहां भाजपा अपने पुराने गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस घनश्याम सिंह के जरिए अपनी खोई हुई जमीन को फिर से पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। आगामी दिनों में प्रचार के दौरान दोनों प्रत्याशियों के बीच जुबानी जंग और तेज होने की संभावना है।