हरदा नगर पालिका में सियासी घमासान: भाजपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर
हरदा नगर पालिका में इन दिनों राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। 17 जुलाई को आयोजित सामान्य सम्मेलन के दौरान भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। इस घटना के अगले ही दिन, 18 जुलाई को नगर पालिका उपाध्यक्ष अंशुल गोयल और भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा ने कलेक्टर सिद्धार्थ जैन से मुलाकात कर नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रोचलानी ने नपाध्यक्ष भारती कमेडिया के साथ अभद्र व्यवहार किया है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश’
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार को कांग्रेस ने एक निजी होटल में प्रेस वार्ता आयोजित की। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि पिछले चार वर्षों से नगर पालिका में विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
- महिला पार्षद सुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष ने कोई अभद्रता नहीं की, बल्कि वे शहर के ज्वलंत मुद्दों को उठा रहे थे।
- कांग्रेस पार्षदों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है।
- जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, कांग्रेस के सभी 10 पार्षद परिषद की बैठकों का बहिष्कार करेंगे।
रोचलानी का दावा: ‘जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश’
नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सदन में उनके साथी पार्षद अक्षय उपरीत केवल शहर में मिल रहे दूषित पानी का मुद्दा उठा रहे थे, जिससे भाजपा पार्षद बौखला गए। रोचलानी ने भाजपा पर जनविरोधी फैसले लेने का आरोप लगाते हुए कहा:
जलकर को 75 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये करना और धर्मशाला के शुल्क में भारी वृद्धि करना जनता पर सीधा प्रहार है। रोचलानी ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ शिकायत करने वाले लोग परिषद के सदस्य तक नहीं हैं। उन्होंने इसे आगामी नगर पालिका चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं को फंसाने की सोची-समझी चाल बताया है।
भाजपा का जवाब: ‘वीडियो में सब स्पष्ट है’
वहीं, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष नीतेश बादर ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि सदन का वीडियो सब कुछ बयां कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक महिला अध्यक्ष के सामने जिस तरह से चिल्लाकर बात की गई, वह गरिमा के विरुद्ध है। भाजपा का तर्क है कि शिकायत को झूठा बताकर विपक्ष अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता, क्योंकि घटना के प्रमाण वीडियो फुटेज में साफ तौर पर देखे जा सकते हैं।
