हरदा केंद्रीय विद्यालय में बदहाल शिक्षा व्यवस्था: शिक्षकों की कमी से छात्रों का भविष्य अधर में
हरदा स्थित केंद्रीय विद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक अव्यवस्थाओं और शिक्षकों के भारी अभाव को लेकर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को जिला पंचायत की जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे पालकों ने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ अंजलि जोसेफ को एक ज्ञापन सौंपा। अभिभावकों का स्पष्ट आरोप है कि विद्यालय में पढ़ाई का स्तर बेहद गिर चुका है, जिससे उनके बच्चों का भविष्य खतरे में है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की पुरजोर मांग की है।
दिन भर में सिर्फ एक पीरियड की पढ़ाई, बाकी समय खेलकूद
अभिभावकों ने विद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि स्कूल में सात पीरियड होने के बावजूद, बच्चों को केवल एक पीरियड में ही पढ़ाया जाता है। बाकी का अधिकांश समय बच्चे बिना किसी मार्गदर्शन के इधर-उधर खेलते हुए बिताते हैं। पालकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन नियमित कक्षाएं न चलने से पाठ्यक्रम पूरा होने पर संशय बना हुआ है।
मोबाइल पर होमवर्क और आंखों पर बुरा असर
शिक्षकों की कमी का सबसे अधिक खामियाजा ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। अभिभावकों ने बताया कि:
- शिक्षकों द्वारा होमवर्क छोटे अक्षरों में मोबाइल पर भेजा जाता है।
- होमवर्क समझने के लिए छात्रों को मजबूरन यूट्यूब का सहारा लेना पड़ता है।
- लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने के कारण बच्चों की आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शिकायत करने पर मिलता है स्कूल बदलने का सुझाव
पालक दीप्ति स्वामी ने आरोप लगाया कि जब वे इस समस्या को लेकर विद्यालय प्रबंधन के पास जाते हैं, तो उन्हें समस्याओं का समाधान करने के बजाय बच्चों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में कराने की सलाह दी जाती है। उन्होंने मांग की है कि स्कूल प्रशासन को जिम्मेदारी लेते हुए कक्षा में ही ऐसी तैयारी करानी चाहिए कि छात्रों को मोबाइल पर निर्भर न रहना पड़े। साथ ही, दिए गए होमवर्क की नियमित जांच भी अनिवार्य होनी चाहिए।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
गौरतलब है कि वर्तमान में इस केंद्रीय विद्यालय में पहली से लेकर ग्यारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई हो रही है, जिसके लिए मात्र 21 शिक्षक तैनात हैं। जिला पंचायत सीईओ अंजलि जोसेफ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन को पत्र लिखने की बात कही है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डीएस रघुवंशी को तत्काल विद्यालय जाकर वस्तुस्थिति का जायजा लेने और प्रबंधन के साथ चर्चा कर जल्द से जल्द समाधान निकालने के सख्त निर्देश दिए हैं।
