AI ने बदली इंप्लांटोलॉजी: अब कम हड्डी में भी संभव स्थायी दांत

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तालमेल ने डेंटिस्ट्री की दुनिया में नई क्रांतियां ला दी हैं। अब जबड़े की हड्डी के क्षय से जूझ रहे मरीजों के लिए भी स्थायी दांत लगवाना पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सटीक हो गया है। इंदौर के होटल एसेंशियल में शुक्रवार से शुरू…

दंत चिकित्सा में AI का कमाल: जबड़े की हड्डी कम होने पर भी अब संभव है सफल इंप्लांट

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तालमेल ने डेंटिस्ट्री की दुनिया में नई क्रांतियां ला दी हैं। अब जबड़े की हड्डी के क्षय से जूझ रहे मरीजों के लिए भी स्थायी दांत लगवाना पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सटीक हो गया है। इंदौर के होटल एसेंशियल में शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय डेंटल सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस नई तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

इस मेगा इवेंट में देशभर से लगभग 500 डेंटल सर्जन, विशेषज्ञ और पोस्ट-ग्रेजुएट विद्यार्थी शामिल हुए। सम्मेलन के पहले दिन आयोजित वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे डिजिटल प्लानिंग, एआई आधारित सटीक विश्लेषण और सर्जिकल गाइड जैसी तकनीकों ने इंप्लांट उपचार की सफलता की दर को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

40 वर्षों के शोध से मिली नई मजबूती

इंप्लांटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मयूर खेरनार और डॉ. अभिषेक कुमार दुबे ने स्पष्ट किया कि इंप्लांट का विज्ञान कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह चार दशकों से अधिक के शोध और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है। आधुनिक तकनीकों के विकास ने अब यह संभव कर दिया है कि जिन मरीजों के जबड़े में हड्डी कम है, वहां भी उपलब्ध हड्डी का कुशलतापूर्वक उपयोग करके इंप्लांट लगाए जा सकें।

मधुमेह और बीपी के मरीजों के लिए राहत

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि बढ़ती उम्र के साथ जबड़े की हड्डी का कम होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, न कि कोई लाइलाज समस्या। नई तकनीक से ऐसी विकट स्थितियों में भी उपचार संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी मरीज का डायबिटीज और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है, तो वे भी पूरी तरह सुरक्षित रूप से इंप्लांट करवा सकते हैं। बेहतर पाचन और पोषण के लिए दांतों का स्वास्थ्य होना अनिवार्य है।

  • युवाओं के लिए समाधान: इंप्लांट केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि 16-18 वर्ष से अधिक आयु के उन युवाओं के लिए भी बेहतरीन विकल्प है, जिन्होंने दुर्घटना या किसी अन्य कारण से अपने प्राकृतिक दांत खो दिए हैं।
  • सटीकता में AI की भूमिका: डिजिटल इंप्लांट विशेषज्ञ सुदीप पॉल ने बताया कि एआई टूल्स अब जबड़े की हड्डी का बारीकी से विश्लेषण करते हैं, जिससे यह पता चल जाता है कि इंप्लांट के लिए सबसे सुरक्षित और मजबूत स्थान कौन सा है।

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण

आयोजन सचिव डॉ. गगन जायसवाल ने बताया कि अगले दो दिनों तक वैज्ञानिक सत्र, केस स्टडीज और लाइव डेमोंस्ट्रेशन का दौर चलेगा। आयोजन के चेयरमैन डॉ. मनीष वर्मा के अनुसार, इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य दंत चिकित्सकों को वैश्विक स्तर की तकनीकों से रूबरू कराना है। इस आयोजन में 14 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञ, जिनमें डॉ. शरद शेट्टी और डॉ. कोमल मजूमदार शामिल हैं, अपने अनुभव साझा करेंगे।

विशेषज्ञ का नाम पद/भूमिका
डॉ. शरद शेट्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष, ISOI
डॉ. कोमल मजूमदार अंतरराष्ट्रीय वक्ता
डॉ. मनीष वर्मा आयोजन अध्यक्ष

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