बालाघाट सिंचाई प्लांट आगजनी: पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, आदिवासी परिषद ने दी चेतावनी
बालाघाट जिले के लामता थाना क्षेत्र में 1 जुलाई को माइक्रो लिफ्ट सिंचाई प्लांट में हुई आगजनी की घटना ने अब तूल पकड़ लिया है। घटना के 15 दिन बाद 9 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शुक्रवार शाम आदिवासी विकास परिषद के युवा अध्यक्ष शुभम उईके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि पुलिस ने बदले की भावना से काम करते हुए 5 ऐसे लोगों को भी नामजद कर दिया है, जो उस समय किसी अन्य स्थान पर शोक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।
शुभम उईके ने एक ही परिवार के पिता-पुत्र को आरोपी बनाए जाने को अन्यायपूर्ण करार दिया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को चुनौती देते हुए पूछा कि यदि अदालत में ये लोग निर्दोष साबित होते हैं, तो क्या पुलिस अपनी गलती की जिम्मेदारी लेगी? उन्होंने कहा कि निर्दोषों को फंसाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के प्रति पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना रवैया भी है।
आरोपियों की संख्या में वृद्धि और मानहानि की चेतावनी
आदिवासी विकास परिषद ने पुलिस की बदलती थ्योरी पर भी सवाल उठाए हैं। परिषद का कहना है कि शुरुआत में पुलिस केवल 8-9 संदिग्धों की बात कर रही थी, लेकिन अब अचानक यह संख्या बढ़कर 32 तक पहुंच गई है। शुभम उईके ने चेतावनी दी है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति बेकसूर पाया गया, तो पुलिस के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
- प्रारंभिक संख्या: 8-9 आरोपी
- वर्तमान संख्या: 30-32 आरोपी
- मुख्य आरोप: निर्दोषों को जानबूझकर फंसाना
ग्रामीणों में दहशत, सरपंच की पत्नी ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
इस मामले में गिरफ्तार किए गए सरपंच की पत्नी सरोज सिरसाम ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस बिना किसी सूचना के ग्रामीणों को खेतों से उठाकर ले जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का वातावरण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि काम-काज के समय इस तरह की कार्रवाई से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोग घर से निकलने में भी डर रहे हैं।
पुलिस का पक्ष: गवाहों के बयानों पर हो रही कार्रवाई
इन तमाम आरोपों के बीच लामता थाना प्रभारी जितेंद्र चौहान ने पुलिस का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी भी प्रकार की मनमानी नहीं कर रही है। थाना प्रभारी के अनुसार, जो भी गिरफ्तारियां की जा रही हैं, वे पूरी तरह से चश्मदीद गवाहों और पहले से पकड़े गए आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर की जा रही हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच पारदर्शी है और जो भी साक्ष्य सामने आ रहे हैं, उसी के अनुरूप कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है।
