खरगोन: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से छूट की मांग को लेकर शिक्षकों ने सांसद को सौंपा ज्ञापन
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में सोमवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के एक प्रतिनिधिमंडल ने नागझिरी दौरे पर आए सांसद गजेंद्र पटेल से मुलाकात की और अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने मांग की है कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा के दायरे से बाहर रखा जाए।
क्या है शिक्षकों की मुख्य मांग?
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को दिए गए पत्र में लोकसभा में इस संबंध में एक विशेष विधेयक पारित करने की अपील की है। शिक्षकों का तर्क है कि जो शिक्षक पिछले 25 से 30 वर्षों से प्रदेश के दुर्गम और दूरदराज क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर अब TET की अनिवार्यता थोपना उचित नहीं है।
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- छूट की मांग: 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को TET से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।
- सेवा लाभों का संरक्षण: शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी लाभों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
- विधेयक की मांग: लोकसभा में TET से छूट दिलाने हेतु कानून लाया जाए।
सांसद ने दिया सकारात्मक आश्वासन
शिक्षकों की समस्याओं को सुनने के बाद सांसद गजेंद्र पटेल ने कहा कि यह मुद्दा बेहद गंभीर है और इसे पहले भी लोकसभा में उठाया जा चुका है। सांसद ने आश्वासन दिया कि वे मध्य प्रदेश के अन्य सांसदों के साथ मिलकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात करेंगे और इस मामले का जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
मुलाकात के दौरान प्रमुख प्रतिनिधि
इस प्रतिनिधिमंडल में शिक्षा जगत से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सूची निम्नलिखित है:
| क्रम संख्या | प्रतिनिधि का नाम |
|---|---|
| 1 | प्रभुराम मालवीया |
| 2 | जगदीश चौधरी |
| 3 | अतीक खान |
| 4 | दिनेश पटेल |
| 5 | ग्यारसीलाल पटेल |
| 6 | कृष्णराज राठौर |
| 7 | दिलीप पाटीदार |
| 8 | यदुनंदन बडोले |
शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे अपने अधिकारों के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल, सांसद के आश्वासन के बाद शिक्षकों को एक उम्मीद की किरण नजर आ रही है।










