Safety: बिना हेलमेट-बेल्ट काम कराने से हो रही मौतें, फिर भी बेपरवाह बिजली विभाग

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बिजली विभाग के कामकाज के दौरान सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सोमवार को खपरी डीसी क्षेत्र में 11 केवी लाइन के 15 बिजली पोल शिफ्टिंग का कार्य चल रहा था, जहां श्रमिकों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऊंचाई पर काम करते देखा गया। यह कोई पहली…

बालोद में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही: मौत के साये में काम करने को मजबूर कर्मचारी

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बिजली विभाग के कामकाज के दौरान सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सोमवार को खपरी डीसी क्षेत्र में 11 केवी लाइन के 15 बिजली पोल शिफ्टिंग का कार्य चल रहा था, जहां श्रमिकों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ऊंचाई पर काम करते देखा गया। यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि जिलेभर में चल रहे मेंटेनेंस, ट्रांसफॉर्मर शिफ्टिंग और अवैध कनेक्शन हटाने जैसे कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

सुरक्षा उपकरणों का अभाव, जान जोखिम में डालकर काम कर रहे श्रमिक

विभाग में बड़ी संख्या में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जो बिना हेलमेट, सुरक्षा जैकेट, दस्ताने और सेफ्टी बेल्ट के जानलेवा काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि रोजगार की मजबूरी के कारण वे मौत के मुंह में उतरने को विवश हैं। उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा किट दी जाती है और न ही बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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  • हेलमेट और सुरक्षा जैकेट: अधिकांश कर्मचारियों के पास उपलब्ध नहीं।
  • सेफ्टी बेल्ट और सीढ़ी: ऊंचाई पर काम करते समय सुरक्षा का अभाव।
  • डिस्चार्ज रॉड: बिजली लाइनों पर काम करते समय सबसे जरूरी उपकरण नदारद।

जिले में बीते वर्षों में हुए प्रमुख हादसे

सुरक्षा में बरती जा रही इस लापरवाही के कारण पिछले कुछ सालों में कई कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई है और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

तिथिस्थानघटना का विवरण
8 जून 2025डांडेसरापोल गिरने से मजदूर युगल किशोर गोटी की मौत।
21 अक्टूबर 2020पाररास वार्ड-1महेंद्र साहू करंट की चपेट में आकर गंभीर घायल।
14 दिसंबर 2021चारभाठायोगेश ठाकुर बिजली सप्लाई शुरू होने से बुरी तरह झुलसे।
29 अगस्त 2024लाटाबोड़टूटे तार की चपेट में आने से किसान रामरतन ठाकुर घायल।

क्या कहता है बिजली विभाग?

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि समय-समय पर संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाता है और उपकरण मुहैया कराए जाते हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट है।

इस मामले पर विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. बंड ने कहा, “सभी ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से हो। यदि कहीं भी लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जब तक सुरक्षा मानकों को कागजों से निकालकर धरातल पर लागू नहीं किया जाता, तब तक इन कर्मचारियों की जान पर खतरा बना रहेगा।