Delhi: दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों को हटाने के लिए MCD का बड़ा कदम

दिल्ली में कचरा प्रबंधन की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए नगर निगम (MCD) ने एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है। राजधानी के सभी 12 जोनों से हर रोज निकलने वाले कचरे का समय पर वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए निगम ने 5,900 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाले कचरा प्रसंस्करण…

दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर MCD का बड़ा एक्शन: 5,900 मीट्रिक टन कचरे के निपटान की तैयारी

दिल्ली में कचरा प्रबंधन की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए नगर निगम (MCD) ने एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है। राजधानी के सभी 12 जोनों से हर रोज निकलने वाले कचरे का समय पर वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए निगम ने 5,900 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाले कचरा प्रसंस्करण (Waste Processing) कार्यों को गति दे दी है। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए MCD ने पांच अलग-अलग स्थानों पर कचरा निपटान के लिए कार्य आदेश (Work Award) जारी कर दिए हैं।

निगम के अधिकारियों के अनुसार, चुनी गई कंपनियों ने अपने संयंत्रों और आवश्यक बुनियादी ढांचे को स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। जैसे ही ये प्लांट पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे, दिल्ली में उत्पन्न होने वाले नए कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान शुरू हो जाएगा।

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लैंडफिल साइटों का कायाकल्प और बायो-माइनिंग

राजधानी की तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों—गाजीपुर, भलस्वा और ओखला पर दशकों से जमा कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए MCD लगातार प्रयासरत है। वर्तमान में भलस्वा और ओखला में बायो-माइनिंग के जरिए पुराने कचरे के ढेर को कम करने का काम तेज गति से चल रहा है। वहीं, गाजीपुर लैंडफिल साइट पर जगह की कमी के कारण बायो-माइनिंग की रफ्तार थोड़ी धीमी है, क्योंकि प्रोसेस किए गए कचरे को हटाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, तीनों लैंडफिल साइटों पर हर रोज करीब 6,000 मीट्रिक टन नया कचरा पहुंचता है, जो प्रबंधन के सामने एक बड़ी चुनौती है। विशेष रूप से भलस्वा लैंडफिल पर दबाव सबसे अधिक था, जहां प्रतिदिन 4,500 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा डंप किया जा रहा था। अब निगम ने इस दबाव को कम करने के लिए कचरे को अलग-अलग साइटों पर डायवर्ट करने की रणनीति अपनाई है।

कचरा प्रसंस्करण के लिए निर्धारित क्षमता

MCD ने नए कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए पांच प्रमुख स्थानों को चिह्नित किया है, जहाँ प्रतिदिन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा। इसका विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

स्थानप्रसंस्करण क्षमता (प्रतिदिन)
भलस्वा लैंडफिल साइट1,800 मीट्रिक टन
ओखला लैंडफिल साइट1,400 मीट्रिक टन
नरेला-बवाना1,200 मीट्रिक टन
गाजीपुर लैंडफिल साइट800 मीट्रिक टन
सिंघोला700 मीट्रिक टन

इस नई व्यवस्था से न केवल लैंडफिल साइटों पर कचरे का बोझ कम होगा, बल्कि भविष्य में कूड़े के नए पहाड़ बनने की संभावनाओं पर भी लगाम लगेगी। नगर निगम का लक्ष्य शहर को स्वच्छ बनाने और कचरा प्रबंधन को पूरी तरह से तकनीकी और वैज्ञानिक स्वरूप देने का है।

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