मध्य प्रदेश गवर्नमेंट प्रेस रद्दी घोटाला: दो कर्मचारी सस्पेंड, जांच के दायरे में पांच अन्य अधिकारी
मध्य प्रदेश गवर्नमेंट प्रेस में रद्दी बिक्री के दौरान हुए बड़े घोटाले के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस घोटाले का खुलासा 22 जुलाई को दैनिक भास्कर की एक खोजी रिपोर्ट में हुआ था, जिसमें रद्दी से लदे ट्रकों का वजन दस्तावेजों में कम दिखाकर सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाने का मामला सामने आया था। फिलहाल इस पूरे मामले में पांच अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं।
लापरवाही पर एक्शन और जांच के निर्देश
गवर्नमेंट प्रेस प्रशासन ने रद्दी बिक्री की प्रक्रिया की निगरानी के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की थी। भास्कर की रिपोर्ट के बाद इन सभी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। जांच में प्रभारी समय लेखक चंद्र सुरेश चौर और प्रभारी भंडारी संदीप श्रीवास्तव का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी कंट्रोलर लॉरेंस रॉबर्टसन को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मां ट्रेडर्स की भूमिका पर सवाल, नोटिस जारी
घोटाले में टेंडर लेने वाली कंपनी मां ट्रेडर्स की संलिप्तता भी सवालों के घेरे में है। जांच में सामने आया है कि रद्दी से भरे ट्रकों की तुलाई गोविंदपुरा के संजय धर्मकांटे पर की गई, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मिसरोद स्थित भवानी धर्मकांटे की फर्जी रसीदें लगाई गईं। इस अनियमितता को लेकर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कंपनी का अनुबंध (एग्रीमेंट) तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा।
क्या था मामला?
- राजस्व को नुकसान: प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी खजाने को करीब 1.34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
- दस्तावेजों में हेराफेरी: 15 टन रद्दी से भरे ट्रक का वजन कागजों में महज 3 टन दिखाया गया। एक अन्य मामले में 29.7 टन रद्दी को रिकॉर्ड में घटाकर 6.82 टन दर्ज किया गया।
- साक्ष्यों की पुष्टि: भास्कर की पड़ताल में धर्मकांटों की रसीदों में वजन और समय का बड़ा अंतर पाया गया, जो सीधे तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
गवर्नमेंट प्रेस के कंट्रोलर चंद्रशेखर वालिंबे ने निगरानी समिति के सभी सदस्यों से जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई सरकारी संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े कदम के रूप में देखी जा रही है।










