Water Crisis: दिल्ली में 30 लाख डिफॉल्टर्स पर सरकार सख्त, कार्रवाई तय


दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है। राजधानी में पानी की आपूर्ति तो सुचारू है, लेकिन लाखों उपभोक्ताओं को लंबे समय से बिल नहीं मिल रहे हैं। इस समस्या के समाधान और बिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने 6 महीने का विशेष e-KYC अभियान शुरू करने…

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है। राजधानी में पानी की आपूर्ति तो सुचारू है, लेकिन लाखों उपभोक्ताओं को लंबे समय से बिल नहीं मिल रहे हैं। इस समस्या के समाधान और बिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने 6 महीने का विशेष e-KYC अभियान शुरू करने का फैसला किया है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि शहर में करीब 30 लाख ऐसे कनेक्शन हैं, जो पाइपलाइन से पानी तो ले रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड में न होने के कारण उन्हें बिल जारी नहीं हो पा रहे हैं।

e-KYC अभियान: घर-घर होगा सत्यापन

इस अभियान के तहत जल बोर्ड की ओर से नियुक्त एजेंसियां घर-घर जाकर उपभोक्ताओं का सत्यापन करेंगी। इस प्रक्रिया में मीटर रीडिंग दर्ज की जाएगी और कनेक्शन को नियमित कर बिलिंग प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। इस काम के लिए करीब 700 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा, दिल्ली जल बोर्ड युवाओं के लिए एक इंटर्नशिप प्रोग्राम भी ला रहा है, जिसमें हर साल 40 युवाओं को 10,000 रुपये प्रति माह के स्टाइपेंड पर जल प्रबंधन और उपभोक्ता सेवाओं का अनुभव प्राप्त करने का मौका मिलेगा।

250 वॉटर एटीएम और सीवर विस्तार

राजधानी में जल संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड ने कई नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है:

  • वॉटर एटीएम: 58 करोड़ रुपये की लागत से 250 वॉटर एटीएम लगाए जाएंगे, जिनकी शुरुआत सरकारी स्कूलों से होगी।
  • सीवर कनेक्टिविटी: शहर की 244 अनधिकृत कॉलोनियों और 57 गांवों में नई सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी, जिससे करीब 33 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • आधुनिक तकनीक: 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में आधुनिक स्लज मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

यमुना सफाई के लिए 4,500 करोड़ का मेगा प्लान

यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने 4,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसमें नजफगढ़ नाले सहित अन्य प्रमुख नालों पर ‘इन-सीटू’ (In-situ) ट्रीटमेंट तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि गंदा पानी नदी में गिरने से पहले ही उपचारित हो सके।

परियोजनाओं में जवाबदेही तय करने के लिए भुगतान को ‘परफॉर्मेंस बेस्ड’ रखा गया है। नालों के ट्रीटमेंट के लिए लगाए गए फ्लो मीटर के जरिए उपचारित पानी की मात्रा और गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। ठेकेदारों को भुगतान तभी किया जाएगा जब वे निर्धारित मानकों और परिणामों को पूरा करेंगे।


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