Waste Management: रायपुर की 90 पंचायतों में 31 अक्टूबर तक सख्ती


रायपुर जिले की 90 ग्राम पंचायतों को 31 अक्टूबर 2026 तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बुधवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गांवों को कचरा मुक्त बनाने…

रायपुर के 90 गांवों को 31 अक्टूबर तक मिलेगा ‘क्लीन विलेज’ का दर्जा, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश

रायपुर जिले की 90 ग्राम पंचायतों को 31 अक्टूबर 2026 तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बुधवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गांवों को कचरा मुक्त बनाने के निर्देश दिए हैं। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है।

घर-घर कचरा संग्रहण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता अभियान की सफलता पूरी तरह से जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर है। उन्होंने गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा है:

  • नियमित डोर-टू-डोर कलेक्शन: प्रत्येक घर से कचरा उठाने की व्यवस्था को सक्रिय और सुचारू बनाना।
  • कचरा पृथक्करण: ग्रामीणों को गीले, सूखे और हानिकारक कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करना।
  • वैज्ञानिक निस्तारण: एकत्रित कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा सुनिश्चित करना।
  • स्वच्छता शुल्क: सेवाओं के निरंतर संचालन के लिए स्वच्छता शुल्क की नियमित वसूली।

नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन ने चेतावनी दी कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन अनिवार्य है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत तय समय-सीमा में काम पूरा न करने वाली पंचायतों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्वच्छता व्यवस्था की निरंतर मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं।

विकास के अन्य महत्वपूर्ण एजेंडे

बैठक में स्वच्छता के अलावा ग्रामीण विकास से जुड़े अन्य तकनीकी और प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा की गई। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • BWG का चयन और पंजीयन: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करना।
  • वित्तीय प्रबंधन: 16वें वित्त आयोग की राशि का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग।
  • बुनियादी सुविधाएं: ग्राम पंचायतों में बालिका शौचालय का निर्माण और जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना।

समीक्षा बैठक में जिले के चारों विकासखंडों के आला अधिकारी, जनपद पंचायत प्रतिनिधि और करीब 90 ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव मौजूद रहे। प्रशासन का लक्ष्य इन पंचायतों को मॉडल के रूप में विकसित करना है ताकि जिले को पूरी तरह स्वच्छ बनाया जा सके।


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