Rain: सूरजपुर के सलका पंचायत भवन में भरा पानी, रिकॉर्ड खराब होने का डर

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सलका में इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीरें सामने आई हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही पंचायत भवन पूरी तरह से जलभराव की चपेट में आ गया है। स्थिति यह है कि हल्की बारिश में भी भवन के चारों ओर घुटने तक…

सूरजपुर: बारिश में टापू बना सलका पंचायत भवन, सरकारी दस्तावेजों पर मंडराया खतरा

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सलका में इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीरें सामने आई हैं। बारिश का मौसम शुरू होते ही पंचायत भवन पूरी तरह से जलभराव की चपेट में आ गया है। स्थिति यह है कि हल्की बारिश में भी भवन के चारों ओर घुटने तक पानी जमा हो जाता है, जिससे कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन के पास से गुजरने वाली मुख्य सड़क का स्तर भवन से काफी ऊंचा है। निर्माण के दौरान जल निकासी (ड्रेनेज) की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब आम जनता और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। बारिश का सारा पानी सीधे परिसर के अंदर घुस रहा है, जिससे वहां रखा महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड, फर्नीचर और अन्य कीमती सामग्री नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई है।

सड़क निर्माण में अनदेखी से बढ़ी मुसीबत

स्थानीय निवासियों ने बताया कि मुख्य सड़क के निर्माण के वक्त यदि जिम्मेदार विभाग ने जल निकासी के लिए नाली का प्रावधान किया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती। ग्रामीणों के अनुसार:

  • सड़क का स्तर ऊंचा होने से सारा पानी ढलान की तरह पंचायत भवन की ओर आता है।
  • निकासी के अभाव में जलभराव से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
  • कर्मचारियों को कार्यालय तक पहुंचने के लिए जलजमाव से होकर गुजरना पड़ता है।

प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

लगातार हो रही इस समस्या से परेशान ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से सख्त कदम उठाने की अपील की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए निम्नलिखित कार्य किए जाएं:

ग्रामीणों ने प्रशासन से स्पष्ट कहा है कि पंचायत भवन को ऊंचे प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया जाए या फिर परिसर के चारों ओर पक्की नाली का निर्माण कराया जाए, ताकि बारिश का पानी बिना किसी रुकावट के बाहर निकल सके। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो सरकारी भवन को भारी नुकसान पहुंच सकता है और भविष्य में यहां प्रशासनिक कामकाज करना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।


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