Surajpur: पहली ही बारिश में ढहा लाखों का पुल, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने सरकारी निर्माण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। गोबरी नदी पर हाल ही में लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया अस्थाई रपटा पुल पहली बारिश का दबाव भी नहीं झेल सका और देखते ही देखते बह गया। इस पुल के…

सूरजपुर में पहली बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, लाखों का रपटा पुल बहा

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने सरकारी निर्माण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। गोबरी नदी पर हाल ही में लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया अस्थाई रपटा पुल पहली बारिश का दबाव भी नहीं झेल सका और देखते ही देखते बह गया। इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग यानी राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से पूरी तरह टूट गया है।

आवागमन ठप, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुश्किलें

महज एक महीने पहले ही बनकर तैयार हुए इस पुल के बहने से स्थानीय निवासियों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। डबरीपारा, बासापारा और शिवप्रसाद नगर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों का जिला मुख्यालय और हाईवे से सीधा संपर्क कट गया है। इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली छात्र और मरीज हो रहे हैं, जिन्हें अब अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए मीलों लंबा और कठिन वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा है।

प्रभावित क्षेत्र और स्थिति का विवरण

विवरणजानकारी
प्रभावित गांवडबरीपारा, बासापारा, शिवप्रसाद नगर सहित दर्जनों गांव
पुल की उम्रलगभग 1 माह
मुख्य समस्याराष्ट्रीय राजमार्ग-43 से संपर्क कटा

गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, जांच की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है और गुणवत्ता मानकों को ताक पर रखकर पुल का निर्माण किया गया था। गौरतलब है कि गोबरी नदी पर बना पुराना स्थायी पुल पिछले साल बरसात में ढह गया था, जिसके बाद प्रशासन ने आवाजाही बहाल करने के लिए इस अस्थाई रपटे का निर्माण कराया था। ग्रामीणों ने अब सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

  • निर्माण की गुणवत्ता: घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप।
  • प्रशासनिक लापरवाही: पहली बारिश में ही पुल का बहना बड़ी चूक।
  • ग्रामीणों की मांग: जल्द से जल्द मरम्मत और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था।

फिलहाल, इस मामले पर प्रशासन की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द प्रशासन से ठोस पहल की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी फिर से पटरी पर आ सके।