School बस ड्राइवरों की लापरवाही: 22 बसों में खामियां, ट्रेनिंग में सिखाया सुरक्षा का पाठ

राजधानी रायपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यातायात पुलिस ने एक व्यापक अभियान का संचालन किया है। पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित इस विशेष मैकेनिकल जांच और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में शहर के 38 स्कूलों से जुड़ी 360 बसों का गहन निरीक्षण किया गया। इस दौरान सुरक्षा मानकों की…

रायपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए यातायात पुलिस सख्त: 360 बसों की जांच में 22 में मिलीं खामियां

राजधानी रायपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यातायात पुलिस ने एक व्यापक अभियान का संचालन किया है। पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित इस विशेष मैकेनिकल जांच और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में शहर के 38 स्कूलों से जुड़ी 360 बसों का गहन निरीक्षण किया गया। इस दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली 22 बसों पर मोटरयान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की गई और कुल 53 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया।

जांच में सामने आई स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं

शिविर के दौरान केवल बसों की ही नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाले चालकों और परिचालकों के स्वास्थ्य की भी बारीकी से जांच की गई। मेडिकल रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • 22 बस चालकों में दूर दृष्टिदोष (Eye vision issues) की समस्या पाई गई।
  • 48 चालक-परिचालकों में हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दर्ज की गईं।

16 सुरक्षा मानकों पर परखी गई बसें

पुलिस उपायुक्त (यातायात एवं प्रोटोकॉल) डॉ. अर्चना झा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में एमटी वर्कशॉप, जायका ऑटोमोबाइल, स्वराज माजदा, आयशर और फोर्स मोटर्स के विशेषज्ञों ने बसों की तकनीकी बारीकियों को परखा। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित 16 सुरक्षा मानकों की जांच की गई:

प्रमुख सुरक्षा मानक
बस का निर्धारित पीला रंग और परमिट
जीपीएस (GPS) और सीसीटीवी कैमरे की कार्यक्षमता
फायर एक्सटिंग्विशर और फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता
स्पीड गवर्नर, फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा
चालक का अनुभव और वैध लाइसेंस

चालकों को मिला फायर सेफ्टी का प्रशिक्षण

सुरक्षा अभियान के तहत अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बस चालकों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया। चालकों को आग लगने की स्थिति में बचाव के तरीके सिखाए गए और फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, सभी बसों में पिंक पेट्रोलिंग और यातायात हेल्पलाइन नंबर भी चस्पा किए गए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।

अधिकारियों का बयान: सुरक्षा है सर्वोच्च प्राथमिकता

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) विवेक शुक्ला ने स्पष्ट किया कि स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हम हर साल स्कूल बसों का निरीक्षण और उनके स्टाफ का स्वास्थ्य परीक्षण कराते हैं। जिन बसों में खामियां मिली हैं, उनके प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की यात्रा सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे।”