नारायणपुर में शिक्षा का नया सवेरा: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नवाचार से बदल रही तस्वीर
नारायणपुर जिले में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025-26 के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासन ने न केवल नए स्कूल खोले हैं, बल्कि घर-घर जाकर शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान भी की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार करना है।
नियद नेल्लानार योजना: शिक्षा की पहुंच और नए विद्यालय
जिले में ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है। इरकमट्टी, जड्डूड़ा, तोयामेटा और एनमेटा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में चार नए विद्यालय खोले गए हैं। इससे दूरस्थ गांवों के बच्चों को अब लंबी दूरी तय किए बिना अपने ही क्षेत्र में पढ़ाई की सुविधा मिल रही है। इसके साथ ही, दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने के लिए 12 वैकल्पिक विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं।
स्कूल छोड़ चुके बच्चों की घर-घर तलाश
शिक्षा विभाग ने ‘स्कूल केंद्रता अभियान’ के माध्यम से बड़े पैमाने पर सर्वे किया है। इस अभियान के आंकड़े बेहद उत्साहजनक रहे हैं:
- 24,701 परिवारों का सघन सर्वे किया गया।
- 1,047 ऐसे बच्चों को स्कूल से जोड़ा गया जिन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।
- 1,295 ऐसे बच्चे भी शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल हुए जिन्होंने पहले कभी स्कूल का दरवाजा नहीं देखा था।
प्रतियोगी परीक्षाओं में नारायणपुर के छात्रों का परचम
जिला खनिज न्यास (DMF) निधि के सहयोग से संचालित ‘परियना’ आईआईटी-जेईई-नीट कोचिंग ने स्थानीय छात्रों के सपनों को नई उड़ान दी है। नारायणपुर और ओरछा ब्लॉक के 28 स्कूलों के 199 विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिला है।
| परीक्षा का नाम | सफल विद्यार्थी |
|---|---|
| जेईई मेन्स | 13 विद्यार्थी |
| जेईई एडवांस | 01 छात्रा |
दिव्यांग शिक्षा और शिक्षकों की उपलब्धता
दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए ‘दिव्यांग परियना आवासीय विद्यालय’ एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यहाँ 63 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को न केवल शिक्षा दी जा रही है, बल्कि उन्हें निशुल्क थेरेपी की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। वहीं, स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए डीएमएफ मद से 227 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
आर्थिक सहायता और पोषण पर विशेष ध्यान
मेधावी छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस और नर्सिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए आर्थिक मदद दी गई है। साथ ही, बच्चों के स्वास्थ्य और उपस्थिति को बेहतर बनाने के लिए 443 शालाओं के 12,639 विद्यार्थियों को पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में नारायणपुर के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा के नए और सुनहरे रास्ते खुलेंगे।
