बालोद पुलिस अब अपराधों की गुत्थी सुलझाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लेगी। जिले में अपराध स्थलों से मिलने वाले फिंगरप्रिंट की पहचान अब नेशनल ऑटोमेटिक फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के जरिए की जाएगी। इस आधुनिक प्रणाली के लागू होने से न केवल संदिग्धों की पहचान में तेजी आएगी, बल्कि जांच प्रक्रिया भी अधिक सटीक और वैज्ञानिक हो जाएगी।
कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
इस नई तकनीक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जिले के सभी थानों के अधिकारी-कर्मचारी और कोर्ट मोहर्रिर शामिल हुए। फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ धर्मेंद्र कुमार भारती ने पुलिसकर्मियों को घटनास्थल से फिंगरप्रिंट सुरक्षित जुटाने के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। सत्र के दौरान गिरफ्तार आरोपियों, संदिग्धों और निगरानी बदमाशों के फिंगरप्रिंट लेने की मानक प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया।
NAFIS से जांच में आएगी तेजी
विशेषज्ञों ने बताया कि NAFIS के माध्यम से अब फिंगरप्रिंट का ऑनलाइन मिलान किया जाना संभव है। पहले की तुलना में यह प्रक्रिया काफी उन्नत है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- तत्काल मिलान: अपराध स्थल से मिले निशानों का मिलान सीधे डिजिटल रिकॉर्ड से ऑनलाइन हो सकेगा।
- पुराने रिकॉर्ड से जुड़ाव: यदि फिंगरप्रिंट किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो संदिग्ध तक पहुंचना आसान होगा।
- समय की बचत: मैनुअल मिलान की धीमी प्रक्रिया के स्थान पर अब डिजिटल प्रणाली से जांच में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
साक्ष्य संरक्षण और अज्ञात शवों की पहचान
प्रशिक्षण में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों को गलत तरीके से छूने या हैंडल करने से वे खराब हो सकते हैं, जिससे केस कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, कार्यशाला में अज्ञात शवों की पहचान के लिए उनके चर्म-पोर (फिंगर टिप्स) को सुरक्षित रखने की वैज्ञानिक तकनीक भी सिखाई गई।
अधिकारियों की उपस्थिति
इस प्रशिक्षण सत्र में डीएसपी राजेश बागड़े सहित जिले के विभिन्न थानों और रक्षित केंद्र के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों ने फिंगरप्रिंट संग्रहण और तकनीकी उपयोग से जुड़े व्यावहारिक सवालों पर चर्चा की, जिसका विशेषज्ञों ने मौके पर ही समाधान किया।
