धमतरी में गूंजे ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे: ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में औषधीय काढ़ा वितरण संपन्न
छत्तीसगढ़ के धमतरी स्थित ऐतिहासिक श्री जगदीश मंदिर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पूर्व आयोजित चार दिवसीय विशेष औषधीय काढ़ा वितरण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। भगवान को भोग लगाने के बाद इस दिव्य काढ़े को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। समापन के दिन मंदिर परिसर के बाहर करीब 100 मीटर लंबी कतारें देखी गईं और पूरा वातावरण ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से भक्तिमय हो गया।
धार्मिक परंपरा: क्यों पिलाया जाता है औषधीय काढ़ा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 8 जुलाई को भगवान जगन्नाथ का स्नान कराया गया था। मान्यता है कि इस स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके चलते उन्हें जड़ी-बूटियों से निर्मित विशेष औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया जाता है। स्वास्थ्य लाभ के प्रतीक के रूप में इसी काढ़े को बाद में भक्तों में प्रसाद स्वरूप बांटा जाता है। चार दिनों तक चले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर काढ़ा वितरित किया गया, जिसमें धमतरी सहित आसपास के जिलों से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
रथयात्रा की भव्य तैयारियां और प्रसाद का विवरण
श्री जगदीश मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किरण गांधी ने बताया कि आगामी रथयात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है।
| प्रसाद सामग्री | मात्रा |
|---|---|
| चना | 900 किलो |
| मूंग | 300 किलो |
महापौर ने की परंपरा की सराहना
इस आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धमतरी के महापौर रामू रोहरा ने कहा कि काढ़ा वितरण की यह अनूठी परंपरा आस्था और स्वास्थ्य का संगम है। उन्होंने कहा कि समापन के दिन भक्तों में जिस प्रकार का उत्साह देखने को मिला, वह इस धार्मिक आयोजन की सफलता को दर्शाता है। महापौर ने इस परंपरा को जीवंत रखने के लिए मंदिर समिति के प्रयासों की सराहना की।
भक्तों की आस्था: सुख-समृद्धि की कामना
प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे अपना सौभाग्य बताया। भक्तों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ को अर्पित आयुर्वेदिक काढ़ा न केवल रोगों को दूर करता है, बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष अपने उत्तम स्वास्थ्य और कष्टों के निवारण की विशेष प्रार्थना की।
