किन्नर कैलाश यात्रा पर विवाद: ग्रामीणों ने रिकांगपिओ में किया उग्र प्रदर्शन
किन्नौर न्यूज़: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में प्रसिद्ध ‘किन्नर कैलाश यात्रा’ को लेकर जारी विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। टुकपा-खुनाग इलाके की विभिन्न पंचायतों के ग्रामीणों और स्थानीय देव समाज के सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में एक विशाल आक्रोश रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने जिला उपायुक्त (DC) को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें इस धार्मिक यात्रा को हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि अवैध रूप से यात्रा करने वालों के खिलाफ सख्ती नहीं बरती गई, तो वे बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे।
स्थानीय निवासियों और देव समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यह विरोध किसी की आस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि क्षेत्र की परंपराओं को बचाने के लिए है। राम लाल नेगी ने बताया कि पोवारी और रिब्बा समेत कई गांवों के आराध्य देवताओं ने ‘देववाणी’ के माध्यम से इस यात्रा को पूर्णतः बंद करने के निर्देश दिए हैं। देव समाज का मानना है कि इन दैवीय आदेशों की अवहेलना करना स्थानीय धार्मिक मर्यादाओं को भंग करने जैसा है।
पर्यावरण और जल स्रोतों को गंभीर खतरा
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यात्रा के नाम पर भारी संख्या में बाहरी लोगों के आने से इस पवित्र और संवेदनशील क्षेत्र में गंदगी का अंबार लग रहा है। यात्रियों द्वारा फैलाए जा रहे कचरे के कारण पहाड़ों के प्राकृतिक जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। साथ ही, दुर्लभ जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों के नष्ट होने से पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन खतरे में पड़ गया है।
स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं की अनदेखी
जिया लाल नेगी, ज्ञान देवी और स्नेह नेगी जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाहरी श्रद्धालुओं द्वारा किन्नौर की प्राचीन देव संस्कृति और पवित्र नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इससे क्षेत्र की मूल सांस्कृतिक पहचान को ठेस पहुंच रही है और धार्मिक पवित्रता नष्ट हो रही है।
प्रशासनिक रोक के बाद भी चोरी-छिपे यात्रा जारी
ग्रामीणों के आक्रोश का एक प्रमुख कारण यह है कि प्रशासन द्वारा प्रतिबंध के बावजूद लोग नियम तोड़ रहे हैं। भूस्खलन और ग्लेशियर टूटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका को देखते हुए किन्नौर प्रशासन ने पहले ही यात्रा को स्थगित कर रखा है। इसके बावजूद, कुछ असामाजिक तत्व और श्रद्धालु अवैध रास्तों से यात्रा कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन इन अवैध गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
किन्नर कैलाश का धार्मिक महत्व और यात्रा का स्वरूप
किन्नर कैलाश हिमाचल की सबसे दुर्गम और पवित्र चोटियों में शुमार है, जो हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है। समुद्र तल से लगभग 4,800 मीटर (15,700 फीट) की ऊंचाई पर स्थित इस शिखर पर 79 फीट ऊंचा एक प्राकृतिक शिलाखंड है, जिसे भगवान शिव का स्वरूप (शिवलिंग) माना जाता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| यात्रा का समय | जुलाई से अगस्त |
| मुख्य मार्ग | कल्पा के पास टांगलिंग गांव |
| कठिनाई | 18 से 20 किलोमीटर की जोखिमभरी चढ़ाई |
