धमतरी ने नम आंखों से दी वीर सपूत खिलेश कुमार ध्रुव को अंतिम विदाई
धमतरी जिले के ग्राम शंकरदहा में मंगलवार का दिन बेहद गमगीन रहा, जब गांव के लाडले और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के वीर जवान खिलेश कुमार ध्रुव को अंतिम विदाई दी गई। ड्यूटी के दौरान हुई असामयिक मृत्यु के बाद जैसे ही उनका पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम पहुंचा, पूरा इलाका शोक में डूब गया। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी हजारों की भीड़ ने तिरंगे के साथ बाइक रैली निकालकर अपने नायक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। “भारत माता की जय” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा, जबकि घर पहुंचते ही परिजनों का क्रंदन देख सबकी आंखें नम हो गईं।
नारों से गूंजा शंकरदहा, बारिश भी नहीं रोक सकी जनसैलाब
अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने यह दर्शाया कि खिलेश का व्यक्तित्व कितना प्रभावशाली था। खराब मौसम और बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बुजुर्ग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर उतर आए। हर तरफ “वीर जवान अमर रहे” और “जब तक सूरज-चांद रहेगा, खिलेश तेरा नाम रहेगा” के गगनभेदी नारे गूंज रहे थे।
- सैन्य सम्मान: शंकरदहा स्कूल परिसर में आईटीबीपी और पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को सलामी दी।
- अंतिम संस्कार: राजकीय सम्मान और पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई।
नारायणपुर से वापसी के दौरान हुआ निधन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 32 वर्षीय खिलेश कुमार ध्रुव वर्ष 2013-14 से आईटीबीपी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वे नक्सल प्रभावित नारायणपुर क्षेत्र में अपना कर्तव्य निर्वहन करने के बाद गुवाहाटी (असम) लौट रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। रविवार को इलाज के दौरान उनका दुखद निधन हो गया। उनके निधन से न केवल परिवार ने एक होनहार बेटा खोया है, बल्कि देश ने एक अनुशासित और राष्ट्रभक्त सैनिक को खो दिया है।
राष्ट्र सेवा थी सर्वोपरि: प्रेरणा के स्रोत बने खिलेश
परिजनों ने बताया कि खिलेश का स्वभाव बेहद सरल और मिलनसार था। उन्होंने हमेशा कहा था कि उनके लिए राष्ट्र सेवा ही सर्वोपरि है। उनकी इसी देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरित होकर गांव के कई युवा सुरक्षा बलों में भर्ती हुए हैं। ग्रामीण अमृत लाल ध्रुव का कहना है कि खिलेश की शहादत गांव के लिए एक अपूरणीय क्षति है। स्कूल परिसर में दी गई अंतिम सलामी के बारे में शिक्षकों ने कहा कि यह दृश्य भविष्य में छात्रों को देश की सेवा करने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा और खिलेश की गौरवगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनी रहेगी।
