Guest Teachers: शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर डटे अतिथि शिक्षक, रात सड़क पर गुजारी

छत्तीसगढ़ में अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग को लेकर 1 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक पिछले 20 दिनों से सड़कों पर उतर आए हैं। दुर्ग में हिंदी भवन के समक्ष अपनी मांगों के समर्थन में डटे इन शिक्षकों ने सोमवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का रुख किया। अपनी प्रमुख मांगों…

छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों का आर-पार का आंदोलन: 20 दिनों से जारी है अनिश्चितकालीन धरना

छत्तीसगढ़ में अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग को लेकर 1 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक पिछले 20 दिनों से सड़कों पर उतर आए हैं। दुर्ग में हिंदी भवन के समक्ष अपनी मांगों के समर्थन में डटे इन शिक्षकों ने सोमवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का रुख किया। अपनी प्रमुख मांगों में संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय में वृद्धि को लेकर शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

बारिश की परवाह किए बिना शिक्षकों ने रैली निकाली और देर शाम फ्लैशलाइट जलाकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी शिक्षक देर रात तक शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर ही बैठे रहे। उनका कहना है कि वे पिछले 11 वर्षों से प्रदेश के सुदूर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, लेकिन आज भी वे केवल मामूली मानदेय के भरोसे अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

‘20 हजार रुपये में परिवार चलाना मुश्किल’

राज्य अतिथि शिक्षक संघ के मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उन्हें हर महीने मात्र 20 हजार रुपये मिलते हैं। इस सीमित आय में मकान का किराया, बिजली-पानी का बिल और परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि कई बार आर्थिक तंगी इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें घर से पैसे मांगने पड़ते हैं। यदि परिवार में कोई सदस्य बीमार हो जाए, तो स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है।

  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योगदान: शिक्षकों ने दावा किया कि उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को कलम पकड़ना सिखाकर नक्सलवाद के प्रभाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।
  • 11 वर्षों का शोषण: पिछले एक दशक से अधिक समय से काम करने के बावजूद, उन्हें स्थायी सुरक्षा और उचित वेतन नहीं मिल रहा है।

संविलियन और समायोजन पर ठोस फैसले की दरकार

केशकाल ब्लॉक के एक नक्सल प्रभावित स्कूल में पदस्थ धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि जिन इलाकों में सड़कें तक नहीं थीं, वहां इन शिक्षकों ने बच्चों को पढ़ाकर उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनाया है। अब समय आ गया है कि सरकार केवल कोरे आश्वासन न दे, बल्कि संविलियन या समायोजन पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय ले। उन्होंने सवाल उठाया कि जो शिक्षक दूसरों का भविष्य संवार रहे हैं, उनका अपना भविष्य कौन सुरक्षित करेगा?

आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों के बीच भेदभाव का आरोप

प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने आत्मानंद स्कूलों के शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं दी थीं और वर्तमान सरकार भी विवेकानंद स्कूलों के लिए नई व्यवस्था कर रही है, लेकिन वर्षों से कार्यरत विद्यामितान शिक्षकों की सुध नहीं ली जा रही है। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें विशेष सुविधा नहीं, बल्कि समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा प्रदान की जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले ये शिक्षक अपनी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री को खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की भी मांग कर चुके हैं। इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विद्यामितान के मामले में जो भी उचित होगा, उस पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, शिक्षकों का आंदोलन जारी है और वे अपनी मांगों पर अडिग हैं।


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