रायगढ़ में पति ने पत्नी के खाते से उड़ाए 28 लाख, बिना बताए ज्वाइंट अकाउंट बनवाकर दिया वारदात को अंजाम
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पति ने अपनी पत्नी की जानकारी के बिना उसके बैंक खाते से 28 लाख रुपए से अधिक की राशि निकाल ली। पीड़िता का आरोप है कि पति ने धोखे से उसके बचत खाते को ज्वाइंट अकाउंट में तब्दील करवाया और फिर पूरी रकम पार कर दी। यह पूरा मामला भूपदेवपुर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने अब आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
तलाक का मामला चल रहा है कोर्ट में
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम किरीतमाल की रहने वाली 38 वर्षीय प्रभा डनसेना ने शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने बताया कि पति मनोज डनसेना के साथ विवादों के चलते वह साल 2024 से अपने बेटे के साथ विकास नगर में किराए का मकान लेकर अलग रह रही है। वर्तमान में दोनों के बीच तलाक और भरण-पोषण का कानूनी मामला रायगढ़ के कुटुंब न्यायालय में विचाराधीन है।
साजिश के तहत खाते में जुड़वाया अपना नाम
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि भूपदेवपुर स्थित ग्रामीण बैंक में उसका बचत खाता है, जिसमें वह अपनी मेहनत की कमाई लंबे समय से जमा कर रही थी। महिला का आरोप है कि उसके पति ने उसकी अनुपस्थिति और सहमति का फायदा उठाते हुए बैंक में फर्जीवाड़ा किया। उसने बैंक अधिकारियों के पास आवेदन देकर चुपके से अपना नाम पीड़िता के खाते में जुड़वा लिया और उसे ज्वाइंट अकाउंट बनवा लिया।
3 जुलाई को खाते से निकाल लिए 28.04 लाख रुपए
महिला ने बताया कि जब वह 3 जुलाई को अपने बैंक खाते से राशि निकालने पहुंची, तो उसे पता चला कि उसके खाते से बड़ी रकम गायब है। जांच के बाद सामने आया कि उसके पति मनोज डनसेना ने 28 लाख 4 हजार 710 रुपए की पूरी जमा पूंजी निकाल ली है। इस घटना ने महिला को आर्थिक संकट में डाल दिया है।
मामले का विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पीड़िता | प्रभा डनसेना |
| आरोपी | मनोज डनसेना (पति) |
| कुल राशि | 28,04,710 रुपए |
| थाना क्षेत्र | भूपदेवपुर, रायगढ़ |
पुलिस की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने भूपदेवपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस बैंक से जुड़े दस्तावेजों और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैंक में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में किन खामियों का लाभ उठाया गया।
