Balod Update: एक साल से अधूरी सड़क, ग्रामीणों ने कीचड़ में की धान की रोपाई


छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में प्रशासन की लापरवाही और सड़क निर्माण में हो रही भारी देरी से नाराज भैंसबोड़ गांव के ग्रामीणों ने बुधवार, 29 जुलाई को विरोध का एक अनूठा रास्ता अपनाया। ग्रामीणों ने राम मंदिर से मड़ई चौक तक जाने वाली बदहाल सड़क पर जमा कीचड़ में धान की रोपाई कर अपना आक्रोश…

बालोद: सड़क न बनने से खफा ग्रामीणों का अनोखा विरोध, कीचड़ में की धान की रोपाई

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में प्रशासन की लापरवाही और सड़क निर्माण में हो रही भारी देरी से नाराज भैंसबोड़ गांव के ग्रामीणों ने बुधवार, 29 जुलाई को विरोध का एक अनूठा रास्ता अपनाया। ग्रामीणों ने राम मंदिर से मड़ई चौक तक जाने वाली बदहाल सड़क पर जमा कीचड़ में धान की रोपाई कर अपना आक्रोश जताया। भारी बारिश के बीच ट्रैक्टर लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ काम

जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित भैंसबोड़ गांव में सड़क निर्माण को लेकर बरती जा रही सुस्ती के पीछे के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। परियोजना की स्थिति इस प्रकार है:

  • प्रशासनिक स्वीकृति: मंडी बोर्ड द्वारा 16 लाख 15 हजार रुपये की राशि 12 दिसंबर 2023 को स्वीकृत की गई थी।
  • वर्क ऑर्डर: निर्माण कार्य के लिए 4 सितंबर 2024 को आधिकारिक वर्क ऑर्डर जारी किया गया था।
  • समय सीमा: अनुबंध के अनुसार, सड़क का निर्माण तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना था, लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बाद भी काम धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।

कीचड़ और बदहाली से जूझ रहे ग्रामीण

सड़क निर्माण के अभाव में बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कच्ची सड़क पूरी तरह से कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, जिससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और किसानों का निकलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद जब सड़क स्वीकृत हुई और वर्क ऑर्डर भी जारी हो गया, तो आखिर काम शुरू करने में देरी क्यों की जा रही है? कीचड़ के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है।

अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए डौंडी जनपद पंचायत के सीईओ डीडी मांडले से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। फिलहाल, ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि जल्द से जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सके और उन्हें इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।


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