जांजगीर-चांपा में मंगलवार को यूथ कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय के कचहरी चौक पर एकत्रित हुए कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले में सरकार की विफलता पर सवाल उठाते हुए युवाओं की आवाज को दबाने का आरोप लगाया है।
लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल स्थानीय विधायक व्यास कश्यप ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करना पूरी तरह से अनुचित और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का युवा वर्ग इस घटना से बेहद आहत है और केंद्र सरकार को इस दमनकारी नीति के लिए जनता को जवाब देना होगा।
प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग
यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पंकज शुक्ला ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उनसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है, लेकिन सरकार समाधान निकालने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसा रही है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
यूथ कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक नीट पेपर लीक मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और युवाओं की मांगों को नहीं माना जाता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कचहरी चौक पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदु उभर कर सामने आए:
- NEET पेपर लीक मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज की तीखी निंदा।
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यप्रणाली पर सवाल और इस्तीफे की मांग।
- केंद्र सरकार द्वारा युवाओं की आवाज को कुचलने का आरोप।
इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी समय में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्षी संगठनों के बीच टकराव और अधिक गहरा सकता है।









